ऊना , फरवरी 11 -- हिमाचल प्रदेश के एक गांव में रहते हुए हर महीने करीब चार लाख रुपये का टर्नओवर और 70,000 रुपये के शुद्ध लाभ की यह कहानी किसी कारोबारी की नहीं है बल्कि डेयरी फार्मिंग से एक आम किसान की ज़िंदगी बदलने की एक ज़बरदस्त मिसाल जरनैल सिंह की है।

राज्य सरकार की किसान-हितैषी नीति ने पशुपालन को एक छोटी सी गतिविधि से एक भरोसेमंद और फायदेमंद रोजी-रोटी में बदल दिया है। छोटे स्तर पर कम संसाधन से डेयरी फार्मिंग की शुरुआत करने वाले ठाकरान गांव के श्री सिंह का सफर एक प्रेरणा देने वाली सफलता की कहानी बन गया है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करती है।

श्री सिंह पहले पंजाब में एक कैंटीन में काम करके अपने परिवार का गुज़ारा कर रहे थे, लेकिन कोविड-19 महामारी के दौरान उन्हें यह नौकरी छोड़नी पड़ी। मुश्किल हालात के आगे झुकने के बजाय उन्होंने अपने पिता के डेयरी फार्मिंग के कारोबार को जारी रखने और इसे अपनी रोजी-रोटी का एक मजबूत आधार बनाने का फैसला किया। श्री सिंह के पिता शुरू से ही इस कारोबार से जुड़े थे। श्री सिंह ने धीरे-धीरे डेयरी फार्मिंग के कारोबार को बढ़ाया। पहले उनके पास दस से बीस गाय थीं और अब उन्हाेंने 45 गायों के साथ एक मॉडर्न डेयरी फार्म बनाया है।

आज उनका फार्म पूरे इलाके के लिए एक आदर्श डेयरी फार्मिंग मॉडल बन गया है। श्री सिंह अभी रोज़ाना 2.5 से तीन क्विंटल दूध बचते हैं। दूध की क्वालिटी और फैट प्रतिशत के हिसाब से वह औसतन 40 रुपये प्रति लीटर कमाते हैं। उन्होंने कहा कि वेरका प्लांट उनके डेयरी फार्म से दूध इकट्ठा करता है, जिससे बाजार की दिक्कत खत्म हो गई है। परिवार के सभी सदस्य डेयरी फार्मिंग के काम में मदद करते हैं, और उन्होंने दो और लोगों को भी नियमित नौकरी दी है।

श्री सिंह के डेयरी फार्म में होलस्टीन फ्रीजियन और जर्सी गायें हैं। होलस्टीन फ्रीजियन गायें रोज़ाना लगभग 40 लीटर दूध देती हैं, जबकि जर्सी गायें 20 लीटर तक दूध देती हैं। उन्होंने कहा कि उनके डेयरी फार्म से हर महीने लगभग चार लाख रुपये की आमदनी होती है। श्रमिक, चारा, फीड, दवाइयां और बिजली समेत सभी खर्चों का हिसाब लगाने के बाद वह हर महीने लगभग 70,000 रुपये का कुल लाभ कमाते हैं।

श्री सिंह ने कहा कि पशुपालन विभाग के अधिकारी समय-समय पर उनके फार्म का निरीक्षण करते हैं और फीड प्रबंधन, दवाइयां, चारा और जानवरों की स्वास्थ्य के बारे में ज़रूरी निर्देश देते हैं। इससे दूध की क्वालिटी और उत्पादन दोनों में काफी सुधार हुआ है। इसके अलावा, जानवरों की बीमारियों से बचाव के लिए डिपार्टमेंट लेवल पर वैक्सीनेशन भी किया जाता है। उन्होंने कहा कि हिमाचल सरकार के भैंस के दूध का दाम 61 रुपये प्रति लीटर और गाय के दूध का दाम 51 रुपये प्रति लीटर करने के फैसले से पशुपालकों की आय में काफी सुधार हुआ है। यह फैसला गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित हो रहा है। वह अपने डेयरी फार्म से निकलने वाले गोबर का इस्तेमाल भी अपने खेतों में कर रहे हैं, जिससे उत्पादकता बढ़ी है।

वह गोबर को 1700 रुपये प्रति ट्रॉली की दर से बेचकर अतिरिक्त आय भी प्राप्त कर रहे हैं। श्री सिंह ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी दूरदर्शी सोच और पशुपालन अनुकूल नीतियों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी फार्मिंग एक टिकाऊ और सम्मानजनक आजीविका के रूप में उभर रही है। यह मॉडल आज युवाओं को स्वरोजगार की ओर प्रेरित कर रहा है।

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