रांची , फरवरी 11 -- झारखंड पुलिस मुख्यालय के केंद्रीय सभागार में बुधवार को डीजी-आईजी कॉन्फ्रेंस 2025 के निर्देशों के अनुपालन को लेकर एक महत्वपूर्ण राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक की संयुक्त अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव (गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग) वंदना दादेल और पुलिस महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक झारखंड तदाशा मिश्रा ने की।

बैठक में राज्य के सभी वरीय पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया। साथ ही प्रक्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षक, क्षेत्रीय पुलिस उप-महानिरीक्षक, वरीय पुलिस अधीक्षक और पुलिस अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।

बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित डीजीपी-आईजीपी सम्मेलन में दिए गए निर्देशों के राज्य में क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। अपर मुख्य सचिव वंदना दादेल और डीजीपी तदाशा मिश्रा ने सभी पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया कि सम्मेलन में निर्धारित प्रत्येक बिंदु का थाना स्तर तक सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। नए आपराधिक कानून (न्याय संहिता) के शत-प्रतिशत अनुपालन पर विशेष जोर देते हुए कहा गया कि सभी अनुसंधानकर्ता नए कानूनों के प्रावधानों के अनुरूप कार्य करें और जांच की गुणवत्ता में सुधार लाएं।

अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि गिरफ्तारी आधारित पुलिसिंग के बजाय दोषसिद्धि केंद्रित पुलिसिंग को प्राथमिकता दी जाए। जांच को वैज्ञानिक और तकनीक आधारित बनाने पर बल दिया गया, ताकि न्यायालय में मामलों की मजबूती बढ़े और अपराधियों को सजा दिलाने की दर में सुधार हो।

बैठक में बीट पुलिसिंग और सामुदायिक पुलिसिंग को प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया गया। जिला और थाना स्तर पर नियमित सम्मेलन आयोजित कर आम जनता की भागीदारी बढ़ाने और पुलिस-जन संवाद को मजबूत करने के निर्देश दिए गए।

नक्सल प्रभावित जिलों में कल्याणकारी योजनाओं, युवाओं की सहभागिता, खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए। साथ ही उग्रवादियों के आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के शत-प्रतिशत क्रियान्वयन की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की गई।

बैठक में NATGRID, NAFIS, CCTNS, ई-कोर्ट और एआई आधारित एनालिटिक्स के प्रभावी उपयोग पर जोर दिया गया। सभी अनुसंधानकर्ताओं को ई-साक्ष्य ऐप का 100 प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित करने और भारत सरकार के आई-गोट पोर्टल पर प्रशिक्षण की प्रगति का आकलन करने के निर्देश दिए गए।

मादक पदार्थों के नेटवर्क और अफीम की खेती के खिलाफ एंटी-ड्रग रणनीति तैयार कर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने को कहा गया। साइबर धोखाधड़ी और सोशल मीडिया के दुरुपयोग के खिलाफ भी आम जनता को जागरूक करने पर बल दिया गया।

पोक्सो एक्ट तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की गई। महिला सुरक्षा से जुड़े अपराधों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

राज्य की टूरिस्ट पॉलिसी के तहत पर्यटकों और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी चर्चा हुई।

बैठक में अपर पुलिस महानिदेशक (अभियान) टी. कंदसामी, पुलिस महानिरीक्षक (मानवाधिकार) क्रांति कुमार गड़िदेशी, झारखंड पुलिस अकादमी हजारीबाग के निदेशक अखिलेश कुमार झा, पुलिस महानिरीक्षक (विशेष शाखा) प्रभात कुमार, पुलिस महानिरीक्षक (अप०अनु०वि०) असीम विक्रांत मिंज, पुलिस महानिरीक्षक (प्रशिक्षण) ए. विजयालक्ष्मी, पुलिस महानिरीक्षक (पुलिस मुख्यालय) सुदर्शन मंडल, पुलिस महानिरीक्षक (एसटीएफ) अनुप बिरथरे, पुलिस महानिरीक्षक (प्रोविजन) पटेल मयूर कनैयालाल, पुलिस महानिरीक्षक (अप०अनु०वि०) अजय कुमार लिंडा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त पुलिस उप-महानिरीक्षक स्तर के अधिकारियों एवं अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी बैठक में भाग लिया।

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