नयी दिल्ली , दिसंबर 4 -- रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने तीनों सेनाओं को प्रौद्योगिकी विकास कोष (टीडीएफ) स्कीम के तहत विकसित की गई सात नयी प्रौद्योगिकी सौंपी है।

रक्षा मंत्रालय की शुक्रवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार इन प्रौद्योगिकियों में एयरबोर्न सेल्फ-प्रोटेक्शन जैमर के लिए एक स्वदेशी हाई-वोल्टेज पावर सप्लाई, नौसेना के लिए ज्वार-भाटा के समय जेट्टी छोटे बंदरगाहों पर कुशल परिचालन में सहायक गैंगवे प्रौद्योगकी , अत्याधुनिक लो फ्रीक्वेंसी-हाई फ्रीक्वेंसी स्विचिंग मैट्रिक्स सिस्टम, पनडुब्बियों के लिए वीएलएफ लूप एरियल, फास्ट इंटरसेप्टर पोतों के लिए वाटरजेट प्रोपल्शन सिस्टम, इस्तेमाल की गई लिथियम-आयन बैटरी से लिथियम प्रीकर्सर निकालने में काम आने वाला एक नया प्रोसेस और समुद्र जल के अंदर टोह और निगरानी में काम आने वाली सी-वाटर बैटरी प्रणाली है जो लम्बे समय तक चल सकती है।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि इनमें से हर प्रौद्योगिकी और उत्पाद को देश की औद्योगिक इकाइयों ने ही डीआरडीओ के संबंधित कार्य क्षेत्र के विशेषज्ञों तीनों सेनाओं के साथ मिलकर डिज़ाइन किया और उनका विकास तथा परीक्षण किया है।

इन प्रौद्योगिकियों को हाल में राजधानी में डीआरडीओ की अधिकार प्राप्त समिति ने एक बैठक में तीनों सेनाओं को सौंप दिया। बैठक की अध्यक्षता रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के चेयरमैन डॉ. समीर वी कामत ने की। इस मीटिंग में सशस्त्र बलों, रक्षा उत्पादन विभाग और डीआरडीओ के वारिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

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