बेंगलुरु , दिसंबर 12 -- कांग्रेस के विधायकों की लगातार दो अलग -अलग डिनर पार्टियों ने कर्नाटक की सत्तारूढ़ पार्टी की गहरी दरार को सामने ला दिया है।

इससे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को कांग्रेस की एकजुटता, शासन की विश्वसनीयता और नेतृत्व की प्राथमिकता पर सवाल उठाने के लिए एक बना-बनाया नैरेटिव मिल गया है।

उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के गुरुवार रात बेलगावी डिनर में 30 से अधिक विधायक और मंत्री शामिल थे जिनमें केएच मुनियप्पा, मंकल वैद्य, डॉ. एमसी सुधाकर, एनए हारिस, रमेश बंदीसिद्देगौड़ा, एचसी बालकृष्ण, गणेश हुक्केरी, दर्शन ध्रुवनारायण, अशोक कुमार राय और केवाई नानजेगौड़ा के नाम प्रमुख हैं।

जानकारों का कहना है कि भाजपा से निकाले गए विधायक एसटी सोमशेखर और शिवराम हेब्बार की मौजूदगी सिर्फ लोगों तक पहुंचने का इशारा नहीं है बल्कि मौकापरस्ती की निशानी है। कांग्रेस नैतिक स्टैंडर्ड बनाए रखने का दावा करते हुए पुराने दुश्मनों को ला रही है, जिससे भाजपा को राजनीति करने का मौका मिल रहा है।

यह डिनर पिछले दिन बेलगावी नॉर्थ के पूर्व विधायक फिरोज सैत द्वारा आयोजित की गई एक अलग बैठक के बाद हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उनके करीबी लोग शामिल हुए थे। कांग्रेस हाईकमान ने श्री सिद्दारमैया और श्री शिवकुमार को तनाव कम करने और एकता की इमेज बनाने के लिए एक-दूसरे के घरों पर ब्रेकफास्ट बैठक करने का भी निर्देश दिया था।

पार्टी के अंदर के लोगों का दावा है कि इन डिनर की टाइमिंग और इनक अलग-अलग आयोजित होना, हाईकमान के दखल के बावजूद अंदरूनी खींचतान को दिखाता है। उनका कहना है कि दिख रही गुटबाजी, एक साथ इकट्ठा होना और मुख्यमंत्री पद को लेकर अनिश्चितता कांग्रेस को अंदरूनी झगड़ों में उलझा हुआ दिखाती है, नहीं कि शासन पर ध्यान देने वाली।

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