पटना , दिसंबर 18 -- स्वच्छता और तकनीक के क्षेत्र में बिहार के सीवान जिले के नौतन प्रखंड स्थित लखवा ग्राम पंचायत देश का पहला ऐसा गांव बन गया है, जहां घरों से निकलने वाले कचरे की खरीदारी मोबाइल एप के जरिये की जा रही है।

लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान (एलएसबीए) के तहत शुरू की गई यह पहल ग्रामीण स्वच्छता, डिजिटल नवाचार और आत्मनिर्भरता का प्रभावी मॉडल बनकर उभरी है।

इस अभिनव व्यवस्था के तहत अब तक बोझ माने जाने वाले घरेलू कचरे को आर्थिक मूल्य वाला संसाधन बना दिया गया है। ग्रामीण 'कबाड़ मंडी' नामक मोबाइल एप पर अपने घर से निकलने वाले कचरे का विवरण दर्ज करते हैं। एप पर प्राप्त जानकारी के आधार पर असराज स्कैप सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड नामक एजेंसी निर्धारित समय पर घर पहुंचकर कचरे का वजन करती है और तय दर के अनुसार सीधे भुगतान करती है। इससे कचरा संग्रहण से लेकर भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, समयबद्ध और व्यवस्थित हो गई है।

लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान में सूचना, शिक्षा एवं संचार के राज्य सलाहकार सुमन लाल कर्ण ने बताया कि इस मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता विभिन्न प्रकार के कचरे के लिए स्पष्ट दरों का निर्धारण है। प्लास्टिक बोतल 15 रुपये प्रति किलोग्राम, काला प्लास्टिक दो रुपये, सफेद मिक्स प्लास्टिक पांच रुपये, बड़ा गत्ता आठ रुपये, मध्यम गत्ता छह रुपये, छोटा गत्ता चार रुपये, कागज तीन रुपये और टिन 10 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा जा रहा है। इस व्यवस्था से ग्रामीणों में घरेलू स्तर पर कचरे के पृथक्करण की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है।

लखवा गांव से एकत्रित कचरे को सीधे प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट (पीडब्ल्यूएमयू) और वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट (डब्ल्यूपीयू) तक पहुंचाया जा रहा है। यहां वैज्ञानिक तरीके से कचरे का प्रसंस्करण कर सिंगल यूज प्लास्टिक और नूडल्स रैपर जैसे अपशिष्ट से लैपटॉप बैग, बोतल बैग, कैरी बैग, लेडीज पर्स, डायरी और चाबी रिंग जैसे टिकाऊ और उपयोगी उत्पाद तैयार किये जा रहे हैं। इससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलने के साथ- साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नये अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत राज्यभर में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर व्यापक कार्य किये गये हैं। वर्तमान में बिहार की 7020 ग्राम पंचायतों में वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट और 171 प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट स्थापित की जा चुकी हैं। इन इकाइयों के माध्यम से हजारों टन सिंगल यूज प्लास्टिक का वैज्ञानिक निस्तारण किया जा रहा है, जिससे गांवों की स्वच्छता के साथ पर्यावरण सुरक्षा भी सुनिश्चित हो रही है।

ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने इस पहल को ग्रामीण स्वच्छता की दिशा में मील का पत्थर बताते हुये कहा है कि ग्राम पंचायतों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के तहत घरेलू स्तर पर कचरे का पृथक्करण, उठाव, परिवहन और प्रोसेसिंग की समेकित व्यवस्था विकसित की गई है। इससे न केवल स्वच्छता को नया आयाम मिला है, बल्कि बिहार में तैयार हो रहे कचरा-आधारित उत्पाद अब दूसरे राज्यों के लिये भी प्रेरणा बन रहे हैं।

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