नयी दिल्ली , दिसंबर 11 -- संचार राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने गुरुवार को संसद को बताया कि डिजिटल पते की अवधारणा को लेकर एक नोट इस समय केंद्रीय वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के पास लंबित है और उसकी मंजूरी के बाद इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा।
मंत्री ने राज्यसभा में एक पूरक प्रश्न के उत्तर में बताया कि इसमें निजता और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जायेगा और इसमें बैकग्राउंड में बदलाव सिर्फ यूजर ही कर सकेगा।
डाक विभाग ने इस साल मई में डिजिटल पोस्टल इंडेक्स नंबर (डिजिपिन) जारी किया था। यह संख्याओं और अंग्रेजी के अक्षरों (कुल 10) का संयोजन है जो पूरे देश को चार मीटर गुना चार मीटर के क्षेत्रों में बांटता है। यह अक्षांश और देशांतर पर आधारित है। हर घर, हर कार्यालय, हर खेत और यहां तक कि एक बिजली के खंभे का भी विशिष्ट डिजिपिन हो सकता है। कोई भी व्यक्ति एक क्लिक पर यह पता लगा सकता है कि उसका डिजिपिन क्या है।
श्री पेम्मासानी ने बताया कि डिजिपिन को आधार बनाकर सरकार एक डिजिटल पता प्रणाली विकसित कर रही है। इसे डिजिटल हब फॉर रिफ्रेंस एंड यूनीक वर्चुअल एड्रेस (ध्रुवा) नाम दिया गया है। यह एक एकीकृत प्रणाली होगी जिसमें कोई भी व्यक्ति अपना डिजिटल पता बना सकता है, उसमें बदलाव कर सकता है और किसी भी दूसरे व्यक्ति से उसे साझा कर सकता है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने अवधारणा नोट तैयार कर नवंबर में व्यय विभाग को भेजा है। वहां से मंजूरी मिलने के बाद इसे पूरे देश में लागू किया जा सकेगा। यह एक मशीन द्वारा पढ़ा जा सकने वाला पता तैयार करेगा। इससे लॉजिस्टिक्स डिलिवरी बेहतर होगी, लागत में कमी आयेगी और देश का सकल घरेलू उत्पाद बढ़ेगा।
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