संयुक्त राष्ट्र/चेन्नई , अप्रैल 02 -- विश्व ऑटिज्म दिवस के अवसर पर जहां विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया भर के परिवारों के साथ मिलकर ऑटिस्टिक व्यक्तियों की गरिमा और उनके महत्व का सम्मान करने का आह्वान किया है , वहीं चेन्नई के एसआरएम मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में विश्व ऑटिज्म दिवस के मौके पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम का विषय 'ऑटिज्म और मानवता - हर जीवन का मूल्य है' था।

कॉलेज की डीन डॉ. जयंती आर. ने कहा कि "ऑटिज्म कोई विकार नहीं, बल्कि एक स्पेक्ट्रम है।" उन्होंने ऑटिज्म के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण बदलने के महत्व पर जोर दिया।

एनआईईपीएमडी की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. जे. विजयलक्ष्मी ने ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों के विकास में संचार की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रभावी संचार को सक्षम बनाना ही प्राथमिक ध्यान होना चाहिए, क्योंकि यह स्वतंत्रता और सामाजिक एकीकरण के लिए मौलिक है।

चेन्नई स्थित 'पेबल्स थेरेपी सेंटर' की निदेशक और पूर्व छात्रा सुश्री गीता सुरेंद्रराज ने हस्तक्षेप के लिए व्यावहारिक और करुणामय दृष्टिकोण पर जोर दिया।

विश्व ऑटिज्म डे पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी एक संदेश जारी कर ऑटिस्टिक व्यक्तियों की अंतर्निहित गरिमा का उत्सव मनाने की बात कही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों पर कन्वेंशन के तहत सभी इंसान, चाहे उनकी मानसिक विविधता कैसी भी हो, मानवाधिकारों के पूर्ण हकदार हैं।

महासचिव ने चिंता जतायी कि वर्तमान अशांत समय में सामाजिक कलंक फिर से उभर रहे हैं, जो समानता की दिशा में की गयी प्रगति को कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि अन्य लोगों की तरह ऑटिस्टिक व्यक्तियों को भी अपना जीवन स्वयं संवारने और हमारे साझा भविष्य को आकार देने का पूरा अधिकार होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि समान शिक्षा, निष्पक्ष रोजगार और सुलभ स्वास्थ्य प्रणालियों के माध्यम से ही हम ऑटिस्टिक लोगों को उन्नति के अवसर दे सकते हैं। विविधता को अपनाना हमें सशक्त बनाता है, इसलिए हमें एक अधिक समावेशी दुनिया के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराना चाहिए।

बता दें कि डब्लूएचओ ऐसी नीतियों की वकालत करता रहा है, जो स्वास्थ्य, शिक्षा और कार्यस्थल जैसे क्षेत्रों में 'न्यूरो-इनक्लूसिव' (सभी मानसिक विविधताओं को समाहित करने वाले) वातावरण को बढ़ावा दें।

विश्व स्तर पर, हर 127 में से एक व्यक्ति ऑटिज्म से ग्रसित है, जो एक आजीवन रहने वाली तंत्रिका-विकासात्मक स्थिति है और सामाजिक मेलजोल व व्यवहार को प्रभावित करती है। ऑटिज्म दुनिया भर में स्वास्थ्य हानि के लिए जिम्मेदार शीर्ष 10 'ब्रेन हेल्थ' स्थितियों में से एक मानी जाती है।

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों के बावजूद ऑटिस्टिक लोगों को आज भी सामाजिक कलंक और भेदभाव का सामना करना पड़ता है, जिससे सहायता सेवाओं तक उनकी पहुंच सीमित बनी हुई है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए समावेशी नीतियों और सेवाओं में अधिक निवेश की आवश्यकता है, ताकि उनके अधिकारों की रक्षा की जा सके।

साक्ष्य बताते हैं कि शुरुआती पहचान और समावेशी शिक्षा से उनके कल्याण में सुधार हो सकता है। इसी दिशा में, 27 अप्रैल को डब्लूएचओ देखभाल करने वालों के लिए एक नया प्रशिक्षण कार्यक्रम और वेबिनार शुरू कर रहा है, जो समावेशी देखभाल के व्यावहारिक तरीकों पर केंद्रित होगा।

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