वाशिंगटन , जनवरी 20 -- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मॉरीशस को डिएगो गार्सिया सहित चागोस द्वीपसमूह की संप्रभुता सौंपने को लेकर ब्रिटेन के समझौते की तीखी आलोचना करते हुए इस कदम को पूरी तरह से 'कमजोरी और बेवकूफी' करार दिया है। उन्होंने इसे पश्चिमी देशों की सुरक्षा के लिए खतरा भी बताया है।

श्री ट्रम्प ने सोशल मीडिया ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि ब्रिटेन डिएगो गार्सिया का नियंत्रण सौंपने की तैयारी कर रहा है, जहां पर अमेरिका और ब्रिटेन का रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सैन्य बेस है। उन्होंने कहा, "हैरानी की बात है कि हमारा 'शानदार' नाटो सहयोगी ब्रिटेन अभी डिएगो गार्सिया द्वीप को मॉरीशस को देने की योजना बना रहा है, और ऐसा बिना किसी वजह के कर रहा है।"उन्होंने चेतावनी दी कि इस कदम को वैश्विक प्रतिद्वंद्वियों द्वारा कमजोरी के रूप में देखा जाएगा। उन्होंने कहा, "इसमें कोई शक नहीं है कि चीन और रूस ने कमजोरी के इस काम पर ध्यान दिया है। ये ऐसी अंतरराष्ट्रीय शक्तियां हैं जो सिर्फ ताकत को पहचानती हैं, यही वजह है कि मेरे नेतृत्व में अमेरिका सिर्फ एक साल बाद अब पहले से कहीं ज़्यादा सम्मानित है।"अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर कहा, "ब्रिटेन का इतनी ज़रूरी ज़मीन को देना बहुत बड़ी बेवकूफी है और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के उन कई कारणों में से एक है जिनकी वजह से ग्रीनलैंड को हासिल करना ज़रूरी है। डेनमार्क और उसके यूरोपीय सहयोगियों को सही काम करना चाहिए।"गौरतलब है कि डिएगो गार्सिया ब्रिटेन और अमेरिका का एक बहुत ही गुप्त संयुक्त सैन्य बेस है जो लंबे समय से रहस्य में है। ब्रिटेन प्रशासित किया जाने वाला यह द्वीप ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच दशकों पुराने ज़मीनी विवाद के केंद्र में है और हाल के हफ्तों में इसको लेकर बातचीत तेज़ हो गयी है। सबसे नज़दीकी ज़मीन से लगभग 1,000 मील (1,600 किमी) दूर स्थित, डिएगो गार्सिया दुनिया के सबसे अलग-थलग द्वीपों में से एक है। यहाँ कोई वाणिज्यिक उड़ाने नहीं हैं, और समुद्र के रास्ते पहुँच बहुत सीमित है, अनुमति केवल द्वीपसमूह के बाहरी द्वीपों या हिंद महासागर से सुरक्षित रास्ते के लिए दी जाती है। डिएगो गार्सिया में प्रवेश के लिए खुद खास इजाज़त की ज़रूरत होती है, जो सिर्फ़ सैन्य केंद्र से जुड़े लोगों या उस इलाके की देखरेख करने वाले ब्रिटिश अधिकारियों तक सीमित है। ब्रिटेन के मंत्रियों पर प्रस्तावित समझौते को लेकर दबाव बढ़ रहा है, जिसके तहत द्वीपों की संप्रभुता मॉरीशस को सौंप दी जाएगी, जबकि सैन्य बेस 99 साल की लीज़ पर ब्रिटेन के नियंत्रण में रहेगा।

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