नैनीताल , मार्च 24 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (टीएचडीसी) के शेयर विवाद को लेकर दायर जनहित याचिका पर मंगलवार को सख्त रुख अख्तियार करते हुए याचिकाकर्ता पर दस हजार रुपये का जुर्माना अधिरोपित किया है।
याचिकाकर्ता भूपेंद्र सिंह एवं अन्य की ओर से एक जनहित याचिका दायर कर भारत सरकार के उस निर्णय पर सवाल उठाया गया जिसमें टीएचडीसी के शेयरों में बदलाव की प्रक्रिया अपनाई गई। याचिका में कहा गया है कि कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 14 के प्रावधानों का पालन किए बिना केंद्र सरकार द्वारा एकतरफा कार्रवाई करना न्यायसंगत नहीं है।
यह भी उल्लेख किया गया कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच टीएचडीसी में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी को लेकर मामला पहले से ही शीर्ष अदालत (एससी) में लंबित है। ऐसे में याचिकाकर्ताओं ने केंद्र सरकार के कदम को अनुचित बताया।
याचिका में उल्लेख है कि टीएचडीसी की स्थापना वर्ष 1988-89 में केन्द्र सरकार और तत्कालीन उत्तर प्रदेश के संयुक्त उपक्रम के रूप में की गई थी, जिसका उद्देश्य भागीरथी नदी एवं उसकी सहायक नदियों पर जलविद्युत विकास करना था।
वहीं, वर्ष 2020 में केंद्र सरकार द्वारा टीएचडीसी के 74.75 प्रतिशत शेयर एनटीपीसी को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। यह भी कहा गया कि सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया था कि कंपनी की पहचान और संरचना यथावत रखी जाएगी तथा बोर्ड में केवल दो निदेशक एनटीपीसी से शामिल होंगे।
याचिका में यह भी कहा गया है कि शेयर खरीद समझौते के तहत टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड, जो कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत कंपनी है, का मुख्यालय टिहरी, उत्तराखंड में स्थित है और इसकी अधिकृत शेयर पूंजी 4000 करोड़ रुपये है।
मामले को सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने याचिका की पोषणीयता पर सवाल उठाते हुए याचिकाकर्ताओं पर 10000 रुपए का जुर्माना लगाया। साथ ही याचिका को पूरी तरह से निस्तारित कर दिया है। पीठ ने जुर्माने की राशि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के खाते में जमा करने के निर्देश दिए हैं।
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