भोपाल , अप्रैल 04 -- मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता पर पुनर्विचार की मांग की है। उन्होंने प्रदेश के दो लाख से अधिक शिक्षकों की समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए इसे भूतलक्षी के बजाय भविष्यलक्षी प्रभाव से लागू करने का आग्रह किया है।
पत्र में सिंह ने उल्लेख किया कि सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय के बाद राज्य सरकार द्वारा सभी प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सेवा के अंतिम चरण में 25 से 30 वर्षों से कार्यरत शिक्षकों के लिए यह व्यवस्था अनुचित है और इससे उनकी आजीविका पर संकट उत्पन्न हो सकता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य सरकार को इस मामले में रिव्यू पिटिशन या क्यूरेटिव पिटिशन दायर कर शिक्षकों का पक्ष न्यायालय में रखना चाहिए, जिससे शिक्षकों पर अतिरिक्त आर्थिक भार न पड़े। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जब तक अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक टीईटी की अनिवार्यता को स्थगित किया जाना चाहिए।
दिग्विजय सिंह ने यह भी तर्क दिया कि मध्यप्रदेश में पहले से ही मेरिट आधारित भर्ती प्रक्रिया लागू है और शिक्षक आवश्यक शैक्षणिक योग्यताएं पूरी कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार कानून 2009 को भूतलक्षी प्रभाव से लागू करना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए शीघ्र आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएं।
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