ऋषिकेश , जनवरी 10 -- उत्तराखंड में एम्स ऋषिकेश के चिकित्सकों ने हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 65 वर्षीय वृद्ध मरीज का बिना ओपन हार्ट सर्जरी सफल इलाज किया है।

हृदय के माइट्रल वाल्व में गंभीर लीकेज के कारण मरीज की हृदय की पम्पिंग क्षमता मात्र 20 प्रतिशत रह गई थी, जिससे उसकी स्थिति अत्यंत नाजुक हो गई थी। उम्र अधिक होने और पहले से हृदय संबंधी जटिलताओं के चलते सर्जरी संभव नहीं थी। ऐसे में एम्स के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने अत्याधुनिक ट्रांसकैथेटर एज-टू-एज रिपेयर (टीईईआर) तकनीक का सफलतापूर्वक उपयोग कर मरीज को नया जीवन दिया।

एम्स ऋषिकेश के कार्डियोलॉजी विभाग द्वारा यह जटिल प्रक्रिया 30 दिसंबर 2025 को संपन्न की गई। मरीज हरिद्वार जनपद की तहसील रुड़की के मोहनपुर जट गांव निवासी जगतवीर सिंह हैं। इलाज के बाद अब उनकी हालत स्थिर है और हाल ही में उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

इलाज के बाद जगतवीर सिंह ने बताया कि वर्ष 2023 में उनके हृदय में स्टेंट डाले गए थे, लेकिन बीते कुछ महीनों से उन्हें सांस फूलने और चलने-फिरने में अत्यधिक परेशानी हो रही थी। हरिद्वार के विभिन्न अस्पतालों में जांच के बाद माइट्रल वाल्व में गंभीर लीकेज की पुष्टि हुई और सर्जरी की सलाह दी गई, लेकिन जोखिम अधिक होने के कारण वे एम्स ऋषिकेश पहुंचे। यहां टीईईआर तकनीक से उनका सफल इलाज किया गया, जिसके बाद अब वे स्वयं को काफी स्वस्थ महसूस कर रहे हैं।

एम्स के कार्डियोलॉजिस्ट एवं अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. बरूण कुमार ने बताया कि मरीज को सीवियर माइट्रल रिगर्जिटेशन था और हृदय की पम्पिंग क्षमता केवल 20 प्रतिशत रह गई थी, जबकि सामान्य स्थिति में यह लगभग 60 प्रतिशत होती है। उन्होंने बताया कि टीईईआर एक न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया है, जिसमें माइट्रल वाल्व की लीकेज को माइट्राक्लिप (माइक्लिप) डिवाइस की मदद से बिना सर्जरी ठीक किया जाता है। इस प्रक्रिया में डॉ. सुवेन कुमार, सीटीवीएस विभाग के वरिष्ठ सर्जन डॉ. अंशुमान दरबारी, एनेस्थेसिया विशेषज्ञ डॉ. अजय कुमार सहित अन्य चिकित्सकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

उन्होंने बताया कि टीईईआर तकनीक में छाती खोले बिना जांघ की रक्त नली के माध्यम से एक विशेष क्लिप हृदय तक पहुंचाई जाती है। यह क्लिप माइट्रल वाल्व के लीकेज वाले हिस्सों को आपस में जोड़कर रक्त के उल्टे प्रवाह को काफी हद तक रोक देती है। इससे हृदय की कार्यक्षमता में सुधार होता है और सांस फूलना, थकान जैसी समस्याओं से मरीज को राहत मिलती है। इस तकनीक से मरीज जल्दी स्वस्थ होता है और कम समय में अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है।

एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सफलता संस्थान में उपलब्ध विश्वस्तरीय हृदय रोग उपचार सुविधाओं को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों के माध्यम से अब जटिल हृदय रोगों का इलाज बिना ओपन हार्ट सर्जरी के भी संभव हो रहा है, जिससे मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हो रहा है।

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