टिहरी , फरवरी 11 -- गर्मी के मौसम से पूर्व वनाग्नि की संभावित घटनाओं को देखते हुए टिहरी जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। बुधवार को कलेक्ट्रेट स्थित वीसी कक्ष में जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल की अध्यक्षता में जिला स्तरीय वनाग्नि सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें वनाग्नि रोकथाम को लेकर व्यापक रणनीति तय की गई।

बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी प्रकार की अनियंत्रित आग बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने डीपीआरओ एम.एम. खान को निर्देश दिए कि सभी ग्राम प्रधानों को नियंत्रित रूप से आग लगाने के संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही चेतावनी दी कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

डीएम ने वनाग्नि की घटनाओं की त्वरित सूचना और निगरानी के लिए "फॉरेस्ट फायर उत्तराखंड" ऐप अधिक से अधिक लोगों द्वारा डाउनलोड कराने के निर्देश दिए। उन्होंने 'जन-जन की सरकार' शिविरों के माध्यम से वन विभाग की पेरूल कलेक्शन योजना की जानकारी ग्रामीण स्तर तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया, ताकि सूखी पिरूल के वैज्ञानिक निस्तारण से आग की घटनाओं में कमी लाई जा सके।

बैठक में डीएफओ टिहरी पुनीत तोमर ने टिहरी, नरेंद्रनगर एवं मसूरी वन प्रभागों की रेंजवार स्थिति, वन संपदा, प्रमुख प्रजातियों तथा वन दुर्घटनाओं के कारणों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने डाइज़र में स्थापित कंट्रोल रूम, क्रू स्टेशनों, उपलब्ध यांत्रिक संसाधनों और वनाग्नि प्रबंधन की अग्रिम तैयारियों पर प्रकाश डाला। साथ ही जनपद के पाँच चिन्हित संवेदनशील वन क्षेत्रों पर विशेष निगरानी की आवश्यकता पर बल दिया।

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