लंदन/रांची , जनवरी 21 -- ारखंड के पर्यटन, कला-संस्कृति, खेल एवं युवा कार्य विभाग के मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि लंदन में म्यूज़ियम ऑफ़ लंदन आर्कियोलॉजी (एमओएलए) के साथ झारखण्ड के प्राचीन मेगालिथ,मोनोलिथ स्थलों के संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन पर गहन व सार्थक चर्चा हुई।

श्रीकुमार ने कहा कि हमारी टीम यूके के 4 प्रमुख संस्थानों से संवाद कर रही है, ताकि सर्वोत्तम तकनीकी विशेषज्ञता के साथ आगे की ठोस कार्ययोजना बनाई जा सके। इन ऐतिहासिक धरोहरों को यूनेस्को विश्व धरोहर के रूप में वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। झारखण्ड की विरासत, अब विश्व के सामने होगी।

मंत्री श्री कुमार के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल की बैठक आधिकारिक यूनाइटेड किंगडम में झारखण्ड की मेगालिथिक, मोनोलिथिक एवं जीवाश्म (फॉसिल) विरासत के संरक्षण एवं वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में महत्वपूर्ण संस्थागत के संबंध में हुई।

इस क्रम में श्री कुमार का कल लंदन में म्यूजियम ऑफ लंदन आर्कियोलॉजीके साथ झारखण्ड के प्राचीन मेगालिथ, मोनोलिथ स्थलों के संरक्षण, वैज्ञानिक प्रलेखन, तकनीकी मूल्यांकन तथा दीर्घकालिक प्रबंधन ढांचे पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। बैठक में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप संरक्षण पद्धतियों, तकनीकी सहयोग तथा क्षमता-विकास के संभावित क्षेत्रों पर चर्चा की गई।

इसी क्रम में वार्डेल आर्मस्ट्राम,एस एल आर कंसलटिंग के साथ आयोजित बैठक में झारखण्ड के मेगालिथिक, मोनोलिथिक एवं फॉसिल-समृद्ध स्थलों के वैज्ञानिक संरक्षण, पर्यावरण-संवेदी प्रबंधन तथा दीर्घकालिक योजना से संबंधित विषयों पर विशेषज्ञों से तकनीकी परामर्श किया गया।

इन बैठकों का उद्देश्य झारखण्ड की प्राचीन विरासत के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय तकनीकी विशेषज्ञता के साथ एक संरचित एवं व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार करना है, जिससे इन स्थलों का संरक्षण वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ सुनिश्चित किया जा सके।

उक्त पहल झारखण्ड की मेगालिथिक, मोनोलिथिक एवं फॉसिल विरासत को यूनेस्को विश्व धरोहर के रूप में वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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