रांची , जनवरी 15 -- झारखंड सरकार के महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग ने आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से चलाए जा रहे पूरक पोषण कार्यक्रम को मजबूत बनाने के लिए टेक होम राशन (टीएचआर) की गुणवत्ता पर सख्त रुख अपनाया है।
विभाग ने गुरुवार को नया दिशा-निर्देश और विस्तृत मेन्यू जारी करते हुए स्पष्ट किया कि टीएचआर में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह निर्देश राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 तथा केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों के अनुरूप हैं।विभाग के प्रधान सचिव ने बताया कि यदि टीएचआर की गुणवत्ता निर्धारित मानकों पर खरी उतरने में विफल रही या आपूर्ति में कोई गड़बड़ी पाई गई, तो आपूर्ति करने वाली एजेंसी के साथ-साथ जिला स्तरीय पदाधिकारी भी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, जिसमें ब्लैकलिस्टिंग से लेकर कानूनी धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करना शामिल है।
विभाग ने पोषण गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए सभी आंगनबाड़ी सेविकाओं और पर्यवेक्षकों को नियमित जांच के निर्देश दिए हैं।नए मेन्यू में विभिन्न आयु समूहों और पोषण आवश्यकताओं के आधार पर अलग-अलग प्रकार के पोषक आहार निर्धारित किए गए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और किशोरियों में कुपोषण की समस्या को जड़ से समाप्त करना है।
मेन्यू में 6 माह से 12 माह के सामान्य बच्चे: मिक्स्ड दलिया (उच्च प्रोटीन और विटामिन युक्त), 6 माह से 12 माह के कुपोषित बच्चे: शिशु आहार (विशेष फॉर्मूला आधारित), 1 से 3 वर्ष के बच्चे: पौष्टिक दलिया, 1 से 6 वर्ष के कुपोषित बच्चे: शक्ति आहार या पौष्टिक आहार, 3 से 6 वर्ष के बच्चे: नमकीन दलिया, गर्भवती महिलाएं: नमकीन दलिया (आयरन और कैल्शियम समृद्ध), धात्री माताएं: नमकीन दलिय, किशोरी बालिकाएं: नमकीन दलिया शामिल है।
विभाग ने जोर देकर कहा कि टीएचआर की संरचना, पोषण मूल्य, विटामिन-मिनरल्स की मात्रा, शेल्फ लाइफ, निर्माण प्रक्रिया और सेवन विधि पूरी तरह भारत सरकार तथा राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान, हरियाणा के मानकों का पालन करेगी। किसी भी सर्किट में घटिया या जाकम गुणवत्ता वाला राशन वितरित करने पर तत्काल रोक लगेगी। वितरण प्रक्रिया की मासिक निगरानी के लिए जिला स्तर पर समितियां गठित की जाएंगी, जो रैंडम सैंपलिंग और लैब टेस्टिंग करेंगी।झारखंड में कुपोषण एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। राज्य के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में आंगनबाड़ी केंद्रों पर लाखों लाभुक निर्भर हैं। पिछले वर्ष जारी एनएफएचएस-5 रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 6 वर्ष से कम आयु के 27.5 प्रतिशत बच्चे स्टंटिंग का शिकार हैं, जबकि 8 प्रतिशत वेस्टिंग से ग्रस्त हैं।
नए निर्देशों से इन आंकड़ों में कमी की उम्मीद है। विभाग का दावा है कि इससे न केवल कुपोषण मुक्ति अभियान को गति मिलेगी, बल्कि बच्चों और महिलाओं का स्वास्थ्य स्तर राष्ट्रीय औसत से ऊपर पहुंचेगा।यह पहल प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निरामय योजना से भी जुड़ी है, जिसके तहत केंद्र से 50 प्रतिशत फंडिंग मिल रही है। जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि सप्ताहांत तक सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर नया मेन्यू लागू हो। विभाग ने सेविकाओं के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने का भी ऐलान किया है, ताकि लाभुकों को सही मात्रा और विधि से आहार उपलब्ध कराया जा सके।
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