रांची , मार्च 12 -- झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 12वें दिन आज सदन में डुमरी विधायक जयराम महतो ने बिजली आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं का मुद्दा उठाया।
श्री महतो ने कहा कि कई जगह ट्रांसफार्मर जलने या तार खराब होने के बाद लंबे समय तक बिजली बहाल नहीं हो पाती। इससे आम लोगों को काफी परेशानी होती है। उन्होंने सरकार से शिकायत व्यवस्था और समय सीमा स्पष्ट करने की मांग की। श्री महतो ने यह भी कहा कि उपभोक्ताओं को यह स्पष्ट नहीं होता कि ट्रांसफार्मर जलने, तार टूटने या अन्य तकनीकी खराबी की स्थिति में वे शिकायत कहां करें।
साथ ही सरकार से जानना चाहा कि तय समय में काम नहीं होने पर अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है। इस मुद्दे पर विपक्ष के सदस्यों ने भी जयराम महतो का समर्थन किया।
वहीं विधायक नवीन जायसवाल ने कहा कि बिजली मुफ्त की व्यवस्था नहीं है, उपभोक्ता इसके लिए भुगतान करते हैं, इसलिए उनका अधिकार है कि उन्हें अच्छी बिजली सेवा मिले। उन्होंने कहा कि अगर ट्रांसफार्मर जल जाए तो उसे 24 घंटे के भीतर बदलने की व्यवस्था होनी चाहिए।
ऊर्जा मंत्री योगेंद्र महतो ने सदन में स्वीकार किया कि कई बार ट्रांसफार्मर जलने के बाद उसे बदलने में दिक्कत आती है। उन्होंने कहा कि विभाग में ट्रांसफार्मर की कमी होने के कारण समय पर उपलब्धता नहीं हो पाती, जिसके चलते देरी हो जाती है।
विधायक जयराम महतो ने यह भी पूछा कि उपभोक्ता अपनी शिकायत आखिर कहां दर्ज कराएं। इसके जवाब में मंत्री ने कहा कि उपभोक्ता एग्जीक्यूटिव इंजीनियर और डिवीजन कार्यालय में शिकायत कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि गर्मी को देखते हुए विभाग जल्द ही एक टोल-फ्री नंबर भी जारी करेगा, ताकि लोग आसानी से बिजली संबंधी शिकायत दर्ज करा सकें।
विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन ने सदन में राज्य में कृषि एवं वन उत्पादों के लिए मानक गुणवत्ता प्रयोगशाला नहीं होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य में अदरक, महुआ, कटहल, टमाटर समेत कई प्रकार के फल-सब्जियों और कृषि उत्पादों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है, लेकिन गुणवत्ता परीक्षण की सुविधा नहीं होने के कारण किसानों को वैश्विक बाजार का लाभ नहीं मिल पाता।
विधायक कल्पना ने सरकार से मांग की कि राज्य में कृषि और वन उत्पादों की मैपिंग कर एक स्पष्ट योजना तैयार की जाए और उनके वैश्विक बाजार में खपत का आकलन किया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि रांची और देवघर हवाई अड्डे पर मानक गुणवत्ता प्रयोगशाला स्थापित की जाए, ताकि निर्यात से पहले उत्पादों की जांच हो सके और किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिल सके।
इस पर जवाब देते हुए कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि भविष्य में मानक गुणवत्ता परीक्षण की आवश्यकता को देखते हुए विभाग ने इस संबंध में केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है। आवश्यकता पड़ने पर राज्य सरकार इस दिशा में आगे पहल कर किसानों को सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास करेगी।
विधायक अरूप चटर्जी ने विधानसभा में झारखंड में धान खरीद की धीमी रफ्तार का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने 6 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य तय किया है। लेकिन अब तक केवल लगभग 3 लाख मीट्रिक टन ही खरीद हो सकी है। उन्होंने यह भी कहा कि कई प्रखंडों में पैक्स ठीक से काम नहीं कर रहे हैं, ऐसे में धान खरीद का लक्ष्य कैसे पूरा होगा।
इस पर जवाब देते हुए मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर धान खरीद की अंतिम तिथि 31 मार्च से आगे बढ़ाई जाएगी। पहली बार राज्य सरकार किसानों को धान खरीद का वन टाइम भुगतान कर रही है। मैनपावर की कमी और गोदामों की अलग-अलग लोकेशन होने के कारण धान खरीद की गति कुछ धीमी हुई है।
इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि मार्च तक धान खरीद का लक्ष्य रखना बिचौलियों को फायदा पहुंचाने जैसा है। उन्होंने कहा कि बिहार सीमा से लगे इलाकों में धान की खरीद ज्यादा हो रहा है। सरकार को जनवरी तक ही धान खरीद का लक्ष्य पूरा करने की तैयारी करनी चाहिए थी।
वहीं कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि राज्य में 4408 पैक्स और लैंप्स हैं, लेकिन धान खरीद के लिए फिलहाल करीब 700 से 800 पैक्स का ही उपयोग किया जा रहा है। यदि विभाग बेहतर मैपिंग करे तो इसे और बढ़ाया जा सकता है।
विधायक हेमलाल मुर्मू ने भी धान खरीद में प्रति क्विंटल 10 किलो कटौती करने का मुद्दा सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि यह किसानों के साथ अन्याय है और सरकार को इस पर स्पष्ट नीति बनानी चाहिए।
झारखंड विधानसभा में एक बार फिर विधायकों को कोऑपरेटिव सोसाइटी के माध्यम से जमीन उपलब्ध कराने से जुड़े रजिस्ट्री पोर्टल का मामला उठाया गया। विधायक नवीन जायसवाल ने वित्त मंत्री के आश्वासन के बावाजूद रजिस्ट्री पोर्टल नहीं खुलने पर सदन में सरकार से जवाब मांगा।उन्होंने कहा कि मंत्री द्वारा दिए गए आश्वासन के तीन दिन पूरे हो चुके हैं। लेकिन अभी तक रजिस्ट्री पोर्टल शुरू नहीं किया गया है।
इस पर संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि इस मामले में रांची के उपायुक्त से बातचीत की गई है। जांच में पता चला है कि कोऑपरेटिव सोसाइटी की कुछ जमीन पर अतिक्रमण हो गया है और कुछ जगहों पर जमीन की बंदोबस्ती भी कर दी गई है। इसके अलावा रजिस्ट्री प्रक्रिया में कुछ तकनीकी दिक्कतें भी सामने आई हैं, जिसके कारण फिलहाल पोर्टल शुरू नहीं हो सका है। मंत्री ने सदन को बताया कि पिछले 22-23 वर्षों से विधायकों को कोऑपरेटिव सोसाइटी के माध्यम से जमीन नहीं मिल पाई है।
श्री किशोर ने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए राजस्व मंत्री, राजस्व सचिव और रांची के उपायुक्त के साथ बैठक कर जल्द ही स्थिति स्पष्ट की जाएगी और रजिस्ट्री प्रक्रिया शुरू कराने की दिशा में कदम उठाया जाएगा।
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