रांची , दिसम्बर 11 -- झारखंड विधानसभा शीतकालीन सत्र की कार्यवाही आज अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई।

विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्रनाथ महतो ने गुरुवार को भोजनावकाश के बाद सदन की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने की घोषणा की। विधानसभा के शीतकालीन सत्र की बैठक 5 दिसंबर से शुरू हुई और आज समाप्त हो गई ।इस दौरान कुल पांच बैठकर हुई।

इससे पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सदन में अपने भाषण में विपक्ष पर तीखा हमला बोला और साथ ही केंद्र सरकार के रवैये को राज्य के प्रति भेदभावपूर्ण बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष के पास न कोई तर्क है, न संवेदना और न ही राज्य से जुड़ा कोई ठोस मुद्दा।

उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार का एक वर्ष पूरा हो चुका है और इस दौरान विकास की एक "लंबी और स्पष्ट रेखा" तैयार की गई है। यह शीतकालीन सत्र इसलिए भी खास है क्योंकि यह न केवल विधानसभा के 25वें वर्ष का प्रतीक है बल्कि राज्य के 25वें स्थापना वर्ष का भी अहम चरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड आज अपनी सांस्कृतिक पहचान, सभ्यता और ऊर्जा के साथ नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने छात्रवृत्ति के मुद्दे पर विपक्ष के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए केंद्र सरकार पर कटौती का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि गैर-भाजपा शासित राज्यों के साथ हमेशा से सौतेला व्यवहार किया जाता रहा है, जिसका सबसे अधिक प्रभाव गरीब, आदिवासी, दलित और पिछड़े वर्ग के छात्रों पर पड़ा है। उन्होंने बताया कि अनुसूचित जनजाति उच्च शिक्षा फेलोशिप में 90% की कटौती, विदेशी छात्रवृत्ति योजना में 95% कटौती, अल्पसंख्यक प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति में 40% कटौती, पोस्ट-मैट्रिक में 63% कटौती, आय आधारित तकनीकी छात्रवृत्ति में 61% कटौती केंद्र सरकार ने की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार छात्रों के हक को कम करने वाली नहीं, बल्कि बढ़ाने वाली है। उन्होंने फॉरेन स्कॉलरशिप योजना, गुरुजी क्रेडिट कार्ड (15 लाख तक 7% ब्याज पर लोन), सावित्रीबाई फुले योजना, उत्कृष्ट विद्यालयों की स्थापना, नए पॉलिटेक्निक संस्थान और बढ़ी हुई छात्रवृत्तियों को अपनी सरकार की उपलब्धियां बताया। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि झारखंड का हर युवा, गांव से शहर तक, मजबूत शिक्षा के सहारे अपने भविष्य को संवार सके।

श्री सोरेन ने कहा कि आने वाले 25 वर्षों के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया है, जिसके तहत राज्य में बड़े-बड़े विश्वविद्यालय और शिक्षा संस्थान खुल रहे हैं। इसके साथ ही गरीब और वंचित वर्गों के छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त कोचिंग उपलब्ध कराई जा रही है। झारखंड के शिक्षकों को भी बड़े राष्ट्रीय संस्थानों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो।

मुख्यमंत्री ने केंद्र पर जीएसटी मुआवजा बंद करने और राज्यों के हिस्से में कटौती करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि झारखंड रेलवे को देश का सर्वाधिक राजस्व देता है, लेकिन बदले में राज्य को विस्थापन, प्रदूषण और पलायन की मार झेलनी पड़ रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा, "झारखंड देश को जितना देता है, उतना कोई और राज्य नहीं देता, लेकिन बदले में हमें न्याय नहीं मिलता। केंद्र द्वारा बजट में लगातार कटौती राज्य के विकास में बाधा पैदा कर रही है।" उन्होंने कहा कि उनकी सरकार हर चुनौती का सामना करते हुए राज्य को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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