रांची , अप्रैल 15 -- झारखंड ने आज स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।
राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में एक बड़े और दूरदर्शी निर्णय के तहत धनबाद, खूंटी, जामताड़ा और गिरिडीह के जिला अस्पतालों को पीपीपी मोड में मेडिकल कॉलेज के रूप में अपग्रेड करने की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके साथ ही राज्य चिकित्सा परिषद में इंटर्नशिप करने वाले छात्रों के लिए स्टाइपेंड को भी मंजूरी दी गई है।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि मेरी सोच बिल्कुल स्पष्ट है। जब तक हम बड़े और ठोस निर्णय नहीं लेंगे, तब तक व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है। मेडिकल कॉलेजों की कमी के कारण हमारे राज्य में डॉक्टरों की भारी कमी रही है। मैं स्वयं इसका उदाहरण हूं, मुझे अपनी मेडिकल शिक्षा के लिए राज्य से बाहर जाना पड़ा। इसलिए मेरा संकल्प है कि झारखंड में अधिक से अधिक मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाएं।"डॉ. अंसारी ने आगे कहा कि बाहर के डॉक्टर राज्य में आने से कतराते हैं, ऐसे में स्थानीय स्तर पर डॉक्टर तैयार करना ही स्थायी समाधान है। डॉ. अंसारी ने इस ऐतिहासिक फैसले के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में झारखंड स्वास्थ्य क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है और नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
मेडिकल कॉलेज बनने से स्थानीय युवाओं को मेडिकल शिक्षा का अवसर, राज्य में डॉक्टरों की कमी दूर होगी, उच्च स्तरीय इलाज की सुविधा जिले में ही उपलब्ध होंगे, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा, स्थानीय रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, क्षेत्रीय विकास को बड़ा बढ़ावा मिलेगा, मरीजों को बाहर जाने की जरूरत कम होगी।
डॉ. अंसारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा 20 वर्षों तक भाजपा ने शासन किया, लेकिन राज्य को अपेक्षित विकास नहीं मिला। हमने अपने एक वर्ष के कार्यकाल में ही चार मेडिकल कॉलेज देने का काम किया है। आने वाले दिनों में और भी मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाएंगे। हमारा लक्ष्य सिर्फ और सिर्फ विकास है-झारखंड को अव्वल बनाना है।
यह पहल न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करेगी, बल्कि झारखंड को मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाएगी। आने वाले समय में राज्य एक मेडिकल हब के रूप में उभरने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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