रांची , जनवरी 21 -- झारखंड की राजधानी रांची समेत पूरे राज्य में 23 जनवरी को होने वाले सरस्वती पूजा की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं।
गांवों से लेकर शहरों तक माता सरस्वती की पूजा को लेकर भक्तों में जबरदस्त उत्साह है। मूर्तिकार दिन-रात जुटे हैं, प्रतिमाओं को भव्य स्वरूप दे रहे हैं। वस्त्र, आभूषण, वीणा और चेहरे की भाव-भंगिमा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पूजा का समय नजदीक आने से कारीगरों का काम दोगुना हो गया है। इस बार रांची में एक अनोखा प्रयोग हो रहा है।
प्रसिद्ध मूर्तिकार अजय पाल ने पहली बार एआई तकनीक की मदद से मां सरस्वती की प्रतिमा तैयार की है। यह झारखंड में अपनी तरह का पहला प्रयास है, जो परंपरा और आधुनिकता का संगम दर्शाता है। अजय पाल ने एआई आधारित ब्लूप्रिंट से डिजाइन बनाया, फिर मिट्टी और पुआल से हाथों से प्रतिमा गढ़ी। खास बात, इसमें कोई कपड़ा नहीं इस्तेमाल हुआ। पूरी मूर्ति प्राकृतिक सामग्री से बनी, लेकिन स्वरूप आधुनिक लगता है। एआई मूर्ति मां सरस्वती के शांत, सौम्य दिव्य रूप को जीवंत बनाती है। चेहरे की मुस्कान, वीणा की बारीकी और वस्त्रों की लहरें इतनी सजीव हैं कि दर्शक ठहर जाते हैं।
अजय पाल पिछले कई वर्षों से दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती व काली की मूर्तियां बना रहे हैं। वे कहते हैं, "जमाना बदल गया। कला में तकनीक का समावेश जरूरी है। एआई से डिजाइन लिया, हाथों से आकार दिया। मेहनत ज्यादा लगी, लेकिन परिणाम शानदार।"इस साल पाल ने कई एआई आधारित सरस्वती प्रतिमाएं बनाईं, सभी अलग-अलग डिजाइन वाली। कीमत 300 रुपये से लाखों तक।
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