रांची , अप्रैल 30 -- झारखंड के रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर महिला आरक्षण बिल को अविलंब लागू करने की मांग को लेकर अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) ने राज्यव्यापी प्रतिरोध मार्च के तहत विरोध प्रदर्शन किया।

शांति सेन और गीता तिर्की ने आज कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने इस बिल को महिला आरक्षण बिल के रूप में पेश करने की कोशिश की, जो कि एक झूठ है। महिला आरक्षण विधेयक 2023 में ही पारित हो गया था। जब विपक्ष ने इसे 2024 के चुनावों में तुरंत लागू करने की मांग की, तो वह मोदी सरकार ही थी जिसने इसके कार्यान्वयन को जनगणना होने तक टाल दिया।

विपक्ष के जाति जनगणना की मांग ने मोदी सरकार को मुख्य जनगणना प्रक्रिया के साथ इसे जोड़ने के लिए मजबूर किया। महिला आरक्षण को परिसीमन और सीटों की संख्या बढ़ाने के साथ जोड़कर, मोदी सरकार जाति जनगणना के आधार पर महिलाओं के लिए ओबीसी आरक्षण के सवाल से बचना चाहती थी।

विपक्ष सरकार से मांग कर रहा है कि महिला आरक्षण को वर्तमान की 543 सीटों और विधानसभाओं में तुरंत लागू किया जाए, लेकिन मोदी सरकार इस मांग से भाग रही है। सवाल यह है कि क्यों? मोदी सरकार महिला आरक्षण को विवादास्पद परिसीमन और संसद में सीटों की वृद्धि के साथ जोड़कर क्या हासिल करना चाहती है?मोदी सरकार महिला आरक्षण को तुरंत लागू क्यों नहीं कर सकती? जब 2023 में यह विधेयक सर्वसम्मति से पारित हो गया था, तो मोदी सरकार ने इसे 2024 के चुनाव में लागू क्यों नहीं किया? मोदी सरकार और विलंब महिला आरक्षण बिल लागू करें!कार्यक्रम में मुख्य रूप से मेवा लकड़ा, लेलो उरांव, सीमा कच्छप, फुलमनी होरो, सरिता पासवान, सविता पासवान, राजमणि कुजूर, सरिता सिंह, सुषमा गाड़ी, कंचन उरांव, शांति सेन, गीता तिर्की , नंदिता भट्टाचार्य शामिल हुई।

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