रांची , दिसम्बर 13 -- झारखंड में नगर निकाय चुनाव पहली बार बैलेट पेपर के जरिए कराए जाएंगे।
राज्य निर्वाचन आयोग ने आगामी नगर निकाय चुनाव को लेकर यह अहम निर्णय लिया है। अब तक राज्य में जब भी नगर निकाय चुनाव हुए हैं, उनमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का ही इस्तेमाल किया जाता रहा है। बैलेट पेपर से मतदान होने के कारण चुनाव प्रक्रिया अपेक्षाकृत अधिक जटिल होगी और मतदान से लेकर मतगणना तक निर्वाचनकर्मियों को अतिरिक्त सावधानी और मेहनत करनी पड़ेगी।
राज्य निर्वाचन आयोग ने यह फैसला ईवीएम की अनुपलब्धता के कारण लिया है। आयोग के पास उपलब्ध ईवीएम की आयु पूरी हो चुकी है और जरूरत के मुताबिक मशीनें उपलब्ध नहीं हैं। दूसरे राज्यों से ईवीएम लेने की कोशिश भी सफल नहीं हो सकी। बिहार समेत झारखंड के पड़ोसी राज्यों ने ईवीएम उपलब्ध कराने में असमर्थता जता दी है। वहीं, ईवीएम बनाने वाली कंपनी ने नई मशीनें उपलब्ध कराने के लिए करीब एक वर्ष का समय मांगा है। इन परिस्थितियों को देखते हुए आयोग ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने का निर्णय लिया।
राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव राधेश्याम प्रसाद ने बताया, "इस बार नगर निकाय चुनाव बैलेट पेपर से होगा। मेरे पास जो ईवीएम हैं, उनकी आयु समाप्त हो चुकी है। दूसरे राज्यों ने भी ईवीएम देने से इनकार कर दिया है। नई ईवीएम के लिए कंपनी ने एक साल का समय मांगा है। इन सभी वजहों से बैलेट पेपर के जरिए मतदान कराने का निर्णय लिया गया है।"नगर निकाय चुनाव में मतदाताओं को दो अलग-अलग रंगों के बैलेट पेपर दिए जाएंगे। अध्यक्ष पद के लिए एक रंग का बैलेट पेपर होगा, जबकि वार्ड सदस्य के लिए अलग रंग का। मतदान के दौरान मतदाता दोनों बैलेट पेपर पर अपने मत दर्ज करेंगे और उन्हें अलग-अलग बैलेट बॉक्स में डालना होगा। इससे मतों की पहचान और गणना में आसानी होगी।
राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, बैलेट बॉक्स की पर्याप्त संख्या उपलब्ध है। जिलों में मतदान केंद्रों की संख्या के आधार पर बैलेट बॉक्स का आकलन कर लिया गया है। पुराने ब्लैक बॉक्स की रंगाई-पुताई का काम भी शुरू कर दिया गया है, ताकि चुनाव प्रक्रिया सुचारु रूप से संपन्न कराई जा सके।
इधर, बैलेट पेपर की छपाई को लेकर भी आयोग ने तैयारी तेज कर दी है। आमतौर पर बैलेट पेपर की छपाई कोलकाता में कराई जाती थी, लेकिन इस बार स्थानीय स्तर पर रांची में ही प्रिंट कराने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए प्रिंटिंग प्रेस के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आयोग का कहना है कि इससे समय की बचत होगी और चुनाव की तैयारियों में तेजी आएगी।
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