रांची , अप्रैल 12 -- झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) ने उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में पेपर लीक की आशंकाओं को खारिज कर दिया है।
वहीं आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुमार ने आज यह स्वीकार किया कि अभ्यर्थियों से 10 से 15 लाख रुपये तक लेकर परीक्षा पास कराने की डील की जा रही थी। इस पूरे मामले पर रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री और सीनियर एसपी राकेश रंजन के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में विस्तृत जानकारी दी गई।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अब तक पेपर लीक का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है। गिरफ्तार 159 अभ्यर्थियों के पास चार अलग-अलग सेट के प्रश्न पत्र मिले, जिनमें से केवल चार प्रश्न ही वास्तविक परीक्षा से मेल खाते पाए गए। 120 प्रश्नों में से मात्र चार के मिलान के आधार पर पेपर लीक की पुष्टि नहीं की जा सकती। हालांकि, संगठित सोल्वर और पेपर लीक गैंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी है।
मामले में अंतरराज्यीय गैंग के सरगना अतुल वत्स समेत पांच मुख्य आरोपियों की पहचान की गई है, जो बिहार के निवासी हैं। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह लंबे समय से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली कराने में सक्रिय रहा है।
घटना का खुलासा 11 अप्रैल 2026 को मिली गुप्त सूचना के आधार पर हुआ। सूचना थी कि तमाड़ थाना क्षेत्र के एक अर्द्धनिर्मित भवन में 150 से अधिक अभ्यर्थी संदिग्ध गतिविधियों में जुटे हैं। इसके बाद पुलिस ने विशेष छापेमारी कर देर रात कार्रवाई की।
छापेमारी के दौरान मौके से 164 लोगों को पकड़ा गया, जिनमें 159 अभ्यर्थी (7 महिलाएं) और पांच गैंग सदस्य शामिल थे। तलाशी में प्रिंटर, प्रश्न-उत्तर के तैयार सेट, फटे एडमिट कार्ड, संदिग्ध मोबाइल फोन और बैंक चेक बरामद हुए। जांच में सामने आया कि गैंग के सदस्य अभ्यर्थियों को संभावित प्रश्न और उनके उत्तर रटवा रहे थे।
यह भी खुलासा हुआ कि अभ्यर्थियों से लाखों रुपये लेकर उन्हें परीक्षा में पास कराने का झांसा दिया जा रहा था। कई अभ्यर्थियों ने अपने मोबाइल, एडमिट कार्ड और बैंक चेक तक गिरोह को सौंप दिए थे, ताकि पुलिस की नजर से बचा जा सके।
मामले में तमाड़ थाना कांड संख्या-21/26 के तहत 12 अप्रैल 2026 को प्राथमिकी दर्ज कर सभी 164 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने आठ वाहनों को भी जब्त किया है और अन्य संदिग्धों की तलाश में लगातार छापेमारी जारी है।
मुख्य आरोपी अतुल वत्स का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। वह राजस्थान क्लर्क भर्ती परीक्षा 2017, नीट पेपर लीक 2024, बिहार कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर भर्ती 2024, उत्तर प्रदेश समीक्षा अधिकारी परीक्षा 2024 और यूपी सिपाही भर्ती परीक्षा 2024 जैसे मामलों में भी संलिप्त रहा है।
प्रशासन ने दोहराया है कि परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और ऐसे संगठित गिरोहों के खिलाफ आगे भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
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