रांची , दिसंबर 05 -- झारखंड सरकार ने पॉलिटेक्निक संस्थानों में नीड बेस्ड लेक्चरर्स के साथ-साथ राज्य के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कार्यरत आवश्यकता आधारित असिस्टेंट प्रोफेसर्स को बड़ी राहत देने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है।

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने नियुक्ति प्रक्रिया में एकल अवसर के रूप में अतिरिक्त वेटेज देने का प्रावधान लागू किया है। इसके तहत प्रत्येक एक वर्ष के शिक्षण अनुभव के लिए 01 अंक तथा अधिकतम 05 अंकों तक वेटेज देने का निर्णय लिया गया है।

विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति के लिए झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) को अधियाचना भेज दी गई है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, विज्ञापन जारी होने से पहले सरकार नियमों और नीतियों में आवश्यक संशोधन करने की पूर्ण क्षमता रखती है।

इस पूरे मसले की शुरुआत कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव द्वारा 28 अगस्त 2025 को मानसून सत्र में दिए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव से हुई थी। उन्होंने विधानसभा में जोर देकर कहा था कि वर्षों से एआईसीटीई और यूजीसी मानकों को पूरा करते हुए आवश्यक आधार पर कार्यरत शिक्षक अपने नियमितीकरण और उचित वेटेज के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

विधायक प्रदीप यादव ने मांग की थी कि इन शिक्षकों को उम्र सीमा में छूट दी जाए और प्रति वर्ष सेवा के लिए 5 अंक तक अतिरिक्त वेटेज दिया जाए, ताकि वे प्रतियोगी परीक्षा में बेहतर अवसर प्राप्त कर सकें। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सरकार द्वारा जेपीएससी को भेजी गई अधियाचना में इस छूट का कोई उल्लेख नहीं है।

जवाब में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने सदन में कहा था कि नीतियों का निर्धारण व्यक्तिगत सोच से नहीं होता, बल्कि व्यापक दृष्टिकोण से निर्णय लिए जाते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया था कि शिक्षकों के अनुभव को वेटेज में बदलने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। साथ ही यह भी कहा था कि यदि उम्र सीमा की वजह से वे प्रतियोगी परीक्षा में भाग लेने से वंचित हो रहे हैं, तो उम्र सीमा में छूट देने के उपाय भी तलाशे जाएंगे।

सरकार के इस फैसले से लंबे समय से सेवा दे रहे आवश्यकता आधारित शिक्षकों को नियुक्ति प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण अवसर मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

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