रामगढ़ , अप्रैल 09 -- झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन गुरुवार को बोकारो के ललपनिया जाने के क्रम में रामगढ़ जिले के आरा-सारूबेड़ा, चार नंबर क्षेत्र पहुंचे।
इस दौरान श्री सोरेन ने सीसीएल और टाटा कंपनी से विस्थापित हुए आदिवासी ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। ग्रामीणों को संबोधित करते हुए श्री सोरेन ने कहा कि कोयलांचल क्षेत्र - रामगढ़, बोकारो, गिरिडीह और धनबाद में आदिवासी एवं मूलवासी वर्षों से शोषण का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यहां के लोगों की पुश्तैनी जमीन अधिग्रहण कर लिया गया, लेकिन नौकरी और मुआवजा नहीं मिला है, ऐसा सैंकड़ों मामला है, कोयलांचल में यह समस्या अब गंभीर रूप ले चुकी हैं, जिसका समाधान केवल बड़े जन आंदोलन से ही संभव है।
श्री सोरेन ने कहा कि बोकारो स्टील प्लांट सहित विभिन्न औद्योगिक परियोजनाओं में विस्थापितों को उनका अधिकार नहीं मिला है। उन्होंने याद दिलाया कि वे पहले ही बोकारो स्टील प्लांट क्षेत्र में बची हुई जमीन पर हल जोतने का ऐलान कर चुके हैं। श्री सोरेन ने घाटो क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि टाटा कंपनी और सीसीएल से दर्जनों गांव प्रभावित हुए हैं, लेकिन आज तक विस्थापितों को न तो समुचित रोजगार मिला और न ही उनका पुनर्वास ठीक से हुआ। उन्होंने कहा कि देश-विदेश में कंपनियों का नाम हो गया, लेकिन स्थानीय विस्थापित आज भी बदहाल स्थिति में हैं।
श्री सोरेन ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि विस्थापितों की मांगें पूरी नहीं हुईं तो डेढ़ महीने के भीतर बड़ा जन आंदोलन शुरू किया जाएगा और यहां से कोयला ढुलाई भी रोक दी जाएगी।
इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण मौजूद थे और उन्होंने अपनी समस्याओं को पूर्व मुख्यमंत्री के समक्ष रखा। इससे पूर्व विस्थापित रैयतों ने पूर्व मुख्यमंत्री चम्पई सोरेन का नयामोड में भव्य स्वागत किया। इसके बाद चम्पई सोरेन आरा सरना स्थल में माथा टेका और वहां लोगों को संबोधित किया।
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