नयी दिल्ली , जनवरी 20 -- उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने मंगलवार को यहां ऐतिहासिक गांधी आश्रम में महादेव देसाई पुस्तकालय के विस्तार का उद्घाटन किया और कहा कि यह इस विश्वास की पुष्टि है कि ज्ञान सामाजिक परिवर्तन का सबसे स्थायी साधन है।
श्री राधाकृष्णन ने आश्रम परिसर में स्थित कस्तूरबा संग्रहालय का भी भ्रमण किया जहां महात्मा गांधी और कस्तूरबा गांधी 1930 और 1940 के दशकों में दिल्ली प्रवास के दौरान ठहरे थे। इस यात्रा को अत्यंत भावुक बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि आश्रम में भ्रमण, विशेष रूप से कस्तूरबा बा द्वारा उपयोग किए गए सादे घर और रसोई को देखना उनके सादगीपूर्ण, त्यागपूर्ण और अडिग संकल्प से परिपूर्ण जीवन की सशक्त याद दिलाता है।
समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि महादेव देसाई पुस्तकालय के विस्तार का उद्घाटन केवल एक भौतिक संरचना का विस्तार नहीं है, बल्कि यह इस विश्वास की पुष्टि है कि ज्ञान सामाजिक परिवर्तन का सबसे स्थायी साधन है।
महात्मा गांधी के जीवन में आये बदलाव का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने याद किया कि राष्ट्रपिता ने पश्चिमी परिधान त्यागने का निर्णय भारतीय किसानों की गरीबी से उनके साक्षात्कार से प्रभावित था। उन्होंने मदुरै रेलवे स्टेशन का उल्लेख किया जहां बापू ने केवल लंगोट या धोती पहनने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि यह बदलाव जनता के साथ जुड़ने और उनके उत्थान के लिए आजीवन कार्य करने की राष्ट्रपिता की प्रतिबद्धता का प्रतीक था। उन्होंने स्वदेशी के पक्ष में बापू के विचारों का भी उल्लेख किया और बताया कि कैसे उन्होंने भारत के कपास को मैनचेस्टर में प्रसंस्करण कर पुनः भारत में बेचने का विरोध किया और स्वदेशी को बढ़ावा दिया।
हरिजन सेवक संघ का दौरा करने के बाद उन्होंने कहा कि यह महात्मा गांधी द्वारा रोपा गया बीज है और इस संगठन के कार्यों ने शिक्षा, जागरूकता और सेवा के माध्यम से अस्पृश्यता जैसी सामाजिक कुरीतियों को दूर करने में स्थायी योगदान दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी व्यक्ति का अच्छा या बुरा होना उसके जन्म से नहीं बल्कि उसके चरित्र से निर्धारित होता है।
भारत के पूर्व राष्ट्रपति के. आर. नारायणन के जीवन को स्मरण करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि हरिजन सेवक संघ ने उनकी शिक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उनके जीवन की दिशा तय करने में सहायता की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संघ भविष्य में भी ऐसे अनेक आदर्श व्यक्तित्वों को गढ़ता रहेगा और कहा कि समाज के प्रति निःस्वार्थ सेवा चरित्रवान और विवेकशील व्यक्तियों का निर्माण करती है।
व्यक्ति और समाज के पारस्परिक संबंध पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यद्यपि व्यक्ति अक्सर जीवन निर्माण में समाज की भूमिका को नज़रअंदाज़ कर देता है, फिर भी प्रत्येक व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि वह समाज को कुछ लौटाए। उन्होंने कहा कि समाज सेवा न केवल नैतिक दायित्व है, बल्कि राष्ट्र निर्माण का मार्ग भी है।
उपराष्ट्रपति ने भारत को तीन महान व्यक्तित्व देने के लिए गुजरात का आभार व्यक्त किया जिनमें महात्मा गांधी जिन्होंने देश को स्वतंत्रता दिलाई, सरदार वल्लभभाई पटेल जिन्होंने राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिन्होंने देश के विकास को गति दी शामिल हैं।
कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने गांधी विचारधारा से जुड़े समुदाय के लिए प्रो. डॉ. शंकर कुमार सान्याल द्वारा लिखित पुस्तक "एज ऑफ एनलाइटनमेंट: महात्मा गांधीज़ विज़न" का विमोचन भी किया। उन्होंने महात्मा गांधी, ठक्कर बापा और विनोबा भावे को पुष्पांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर हरिजन सेवक संघ के अध्यक्ष प्रो. डॉ. शंकर कुमार सान्याल, पूर्व सांसद एवं हरिजन सेवक संघ के उपाध्यक्ष नरेश यादव, केवीआईसी के पूर्व अध्यक्ष एवं हरिजन सेवक संघ के उपाध्यक्ष लक्ष्मी दास तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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