जयपुर , फरवरी 26 -- राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि देश की वैज्ञानिक परंपरा में महिला शक्ति सदैव ज्ञान, नवाचार और सृजन की प्रेरक रही है और विकसित भारत 2047 के निर्माण में महिलाओं की भूमिका निर्णायक सिद्ध होगी।
श्री देवनानी गुरुवार को एमएनआईटी में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर आयोजित राजस्थान विज्ञान महोत्सव के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रुप में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित विषय नहीं है बल्कि यह समाज के समय विकास, नवाचार और मानवीय मूल्यों से जुड़ा हुआ जीवन दृष्टिकोण है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों का समन्वय ही भारत को विश्व नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाएगा।
उन्होंने कार्यक्रम की थीम "विज्ञान में महिलाएं विकसित भारत के लिए उत्प्रेरक पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में महिला को सृजन और ज्ञान की मूल शक्ति माना गया है। प्राचीन काल में गार्गी, मैत्रेयी, लोपामुद्रा एवं अन्य ब्रह्मवादिनी विदुषियों ने वेद, दर्शन और सृष्टि के रहस्यों पर गहन चिंतन कर वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विकसित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में महिलाओं ने प्रकृति विज्ञान, चिकित्सा, कृषि एवं पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जो आज के सतत विकास की अवधारणा से जुड़ा हुआ है।
श्री देवनानी ने कहा कि आधुनिक भारत में भी महिलाओं ने विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। कल्पना चावला, टेसी थॉमस, रितु करिधाल, वनिथा एवं अन्य महिला वैज्ञानिकों का योगदान देश की वैज्ञानिक क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अवसर और संसाधन मिलने पर भारतीय बेटियां वैश्विक स्तर पर उत्कृष्टता स्थापित कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य की युवा प्रतिभाएं इंजीनियरिंग, चिकित्सा, कृत्रिम बुद्धिमता, अनुसंधान और स्टार्टअप नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान बना रही हैं। आवश्यकता इस बात की है कि विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में विज्ञान को जिज्ञासा और नवाचार के रुप में विकसित किया जाए तथा बेटियों को विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान के लिए प्रोत्साहित किया जाए। श्री देवनानी ने कहा कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य तभी संभव है जब ज्ञान को संस्कार से, विज्ञान को मूल्य से और तकनीक को मानवता से जोड़ा जाए। विज्ञान का उद्देश्य केवल प्रगति नहीं, बल्कि मानव कल्याण और सामाजिक उत्थान होना चाहिए।
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