अमृतसर , मार्च 09 -- श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने सोमवार को चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा विभिन्न सिख छात्र संगठनों से जुड़े छात्रों के साथ की गयी सख्ती और उनकी दस्तार (पगड़ी) व सिख ककारों के कथित अपमान की कड़ेशब्दों में निंदा की है।

जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि यदि गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में विश्वविद्यालय के भीतर आयोजित कार्यक्रम को लेकर छात्रों को कोई आपत्ति थी, तो यह विश्वविद्यालय प्रशासन की मौलिक जिम्मेदारी थी कि वह दमनकारी कदम उठाने के बजाय उनकी चिंताओं को सुनता। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम से जुड़े विवाद के बीच, पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कुछ दिन पहले मामला सुलझाने के लिए उनसे संपर्क किया था। इसके बाद उन्होंने विश्वविद्यालय को समाधान भी सुझाया था। उन्होंने हालांकि आरोप लगाया कि एक गंभीर और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के बजाय, विश्वविद्यालय प्रशासन ने कथित तौर पर एक खास एजेंडे के तहत मनमानी की। उन्होंने कहा कि प्रशासन के इस आचरण का सख्त नोटिस लिया गया है।

जत्थेदार ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के लिए एकत्र हुए छात्रों के खिलाफ चंडीगढ़ पुलिस की कथित कार्रवाई, जैसे उन्हें धक्का देना, सिख छात्रों की छाती पर सीधे लाठियां मारना, उनकी पगड़ी उतारना और ककारों का अनादर करना, पूरी तरह से अस्वीकार्य है। उन्होंने इस घटना के लिए जिम्मेदार विश्वविद्यालय और पुलिस, दोनों के अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर साहब की बाणी सिखों को सिखाती है कि न तो किसी को डराओ और न ही किसी का डर स्वीकार करो। उन्होंने कहा कि सिख छात्रों के प्रति चंडीगढ़ प्रशासन और पंजाब यूनिवर्सिटी के अधिकारियों का व्यवहार गुरु की शिक्षाओं के बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विरोध प्रकट करना छात्रों का लोकतांत्रिक अधिकार है और उनकी आवाज को बल प्रयोग के माध्यम से दबाया नहीं जा सकता।

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