रांची , जनवरी 30 -- झारखंड की राजधानी रांची के आईएसडीजी रिसर्च फाउंडेशन द्वारा अमलतास बैंक्वेट हॉल, अशोक नगर में ज्ञानशाला एफएलएन कॉन्क्लेव 'डहर' का आयोजन किया गया।

सम्मेलन का उद्देश्य फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरसी (एफएलएन) के क्षेत्र में जमीनी अनुभवों, व्यवहारिक नवाचारों और सहयोगात्मक प्रयासों पर संवाद स्थापित करना था।

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव, निदेशक, आईआईएम रांची नेएक्सपीरियंस लर्निंग पर जोर देते हुए कहा कि प्रारंभिक शिक्षा में छोटे, निरंतर और ज़मीनी प्रयास ही स्थायी परिवर्तन की नींव रखते हैं। उन्होंने "स्मॉल इज ब्यूटीफूल" और "पावर ऑफ स्मॉल" की अवधारणा को एफएलएन के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया।

विशिष्ट अतिथि पारुल शर्मा, शिक्षा विशेषज्ञ, यूनिसेफ ने बच्चों की शिक्षा में अभिभावकों और समुदाय की सक्रिय भूमिका को रेखांकित किया। वहीं हलधर महतो, निदेशक, सामाजिक अंकेक्षण ने प्रारंभिक शिक्षा में गुणवत्ता, जवाबदेही और स्थानीय संदर्भों के महत्व पर अपने विचार साझा किए।

इस अवसर पर आईएसडीजी रिसर्च फाउंडेशन के निदेशक कुमार देवाशीष ने ज्ञानशाला कार्यक्रम की यात्रा साझा करते हुए बताया कि यह पहल किस प्रकार समुदाय-आधारित मॉडल के माध्यम से जमीनी स्तर पर बच्चों की बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक कौशल को मजबूत कर रही है।

कार्यक्रम के दौरान आयोजित ज्ञानदूत संवाद में जमीनी शिक्षकों ने कक्षा अनुभव, चुनौतियाँ और बच्चों में आए सकारात्मक बदलाव साझा किए। साथ ही टीएमएल प्रदर्शनी ने प्रतिभागियों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।

विशेषज्ञ संवाद (पैनल चर्चा) में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने झारखंड में एफएलएन की स्थिति, बहु-स्तरीय कक्षाओं की रणनीतियाँ, समुदाय की भूमिका और तकनीक के उपयोग पर विचार-विमर्श किया। चर्चा में सरकार, नागरिक समाज और समुदाय के संयुक्त प्रयासों को एफएलएन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए आवश्यक बताया गया।

सम्मेलन में शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। धन्यवाद ज्ञापन स्नेहा मिश्रा ने किया।इस अवसर पर आईएसडीजी रिसर्च फाउंडेशन की पूरी टीम की सक्रिय भूमिका और सहयोग सराहनीय रहा।

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