रांची , फरवरी 04 -- झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आज धनबाद में झामुमो के 54वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए।
इस अवसर पर श्री सोरेन ने कहा, सभी को हार्दिक बधाई, आभार और जोहार। आज जोहार सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं है। आज पूरे देश में जोहार के इस सम्मान को समर्थन मिला है, साथ ही विदेशों में भी जहां मैं गया वहां लोग मिलने पर जोहार से संबोधन करते थे।
श्री सोरेन ने कहा, कि आप सभी को मालूम है कि पूरे राज्य में नगर निकाय का चुनाव घोषित हो चुका है इसलिए सीमित समय तक ही हम यह कार्यक्रम कर सकते हैं। खैर, कोई बात नहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा को रात हो या दिन, धूप हो या गर्मी, या बरसात हो या ठंडा, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। हम अपने संघर्ष और अपने कार्यकर्ताओं के साथ हर मौसम में, हर मुसीबत में, हर चुनौती के लिए और हर मंजिल को पाने के लिए एक साथ खड़े होते हैं।
श्री सोरेन ने कहा, आज का यह ऐतिहासिक स्थल, ऐसी जगह है जहां से हमारे मार्गदर्शक रहे नेताओं ने कई ऐतिहासिक घोषणाएं की, कई लंबी लकीर खींची। यहां के आदिवासी-मूलवासियों के हक-अधिकार से लेकर, यहां के जल, जंगल, जमीन से लेकर, इस राज्य के अलग होने की जो घोषणा हुई, इसी मैदान से हुई। कई ऐसे नेता हम लोग के बीच में आए और हम लोगों को रास्ता दिखाया। ऐसे कई मार्गदर्शक आज हम लोगों के बीच में नहीं हैं।
श्री सोरेन ने कहा,, एक ऐसे महान व्यक्ति दिशोम गुरुजी शिबू सोरेन, जिनकी सिर्फ झारखंड में ही नहीं पूरे देश-दुनिया में अलग पहचान रही। आज उन्हें श्रद्धांजलि देकर, उनके बताए रास्ते पर हमें चलना है।राज्य को संवारने का एक संकल्प लेने का भी आज दिन है।
श्री सोरेन ने कहा, धनबाद की यह क्रांतिकारी धरती है जहां अनेक वीरों ने जन्म लिया। गरीब, गुरबा, किसान, मजदूरों को नेतृत्व दिया, उनके लिए सुरक्षा कवच बन कर दमनकारी लोगों के सामने अपना सीना तान कर और यहां के आदिवासी-मूलवासियों को बचाने के लिए अपनी जान की कुर्बानी दे दी।
श्री सोरेन ने कहा, हमारा पूरा झारखंड भी वीर भूमि है। अलग-अलग जगहों पर भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धो कान्हू से लेकर बाबा तिलका मांझी, बिनोद बिहारी महतो जी से लेकर आदरणीय गुरुजी तक का संघर्ष, बलिदान और समर्पण आज हमें अलग पहचान देता है। आज हमें गर्व से अपने आप को झारखंडी कहने की ताकत देता है।
श्री सोरेन ने कहा, देश चलाने में झारखंड का बहुत बड़ा योगदान है। हमारे राज्य ने पूरे देश को संसाधन दिए, लेकिन इस राज्य के लोगों को यातनाएं, गरीबी और अशिक्षा मिली। और यही वजह थी हमारे मार्गदर्शक दिशोम गुरुजी ने अलग राज्य का बिगुल फूंका। उस लड़ाई में अनगिनत बलिदान हुए तब हमें यह राज्य मिला। उसके बाद भी वर्षों तक झारखंड विरोधी लोग सत्ता में रहे। आज 25 साल का राज्य हो गया है। अगर शुरू से इस राज्य की देखभाल की गयी होती तो यह नौजवान राज्य आज इतनी ताकत के साथ खड़ा होता कि कई राज्यों से आगे होता। लेकिन इस राज को बीमारू बनाया गया, खून चूस लिया गया इसका।
श्री सोरेन ने कहा, ये झारखंड विरोधी लोग नहीं चाहते थे कि आदिवासी, दलित, किसान, मजदूर का बच्चा पढ़ लिख कर बड़ा आदमी बने। आज देखिए अबुआ सरकार है और हमने तय किया है कि हर हाल में हम समाज के हर व्यक्ति तक पहुंचेंगे। हर घर तक जाएंगे और हर घर को मजबूत करेंगे। अब हम लोगों ने इस राज्य को रास्ते पर लाने का प्रयास किया है, लेकिन केंद्र में हम लोग के विपरीत सरकार हमसे सौतेला व्यवहार करती है। पर हमने भी प्रण लिया है जैसे लड़ कर झारखंड लिया, वैसे ही अधिकार के लिए भी लड़ा जाएगा, चाहे वो राजनीतिक लड़ाई हो या कानूनी लड़ाई हो।
श्री सोरेन ने कहा, इस राज्य को जानबूझकर गरीब और कमजोर किया गया है। क्योंकि दूसरे राज्य में विकास करना है। वहां पर बिल्डिंग बनवाना है, सड़क बनाना है, तो मजदूर कहां से आएगा। मगर हम लोगों को ऊपरवाले ने इतनी क्षमताएं दी हैं कि अगर इस राज्य के प्रति नीति-निर्धारकों का सही निर्णय होता तो यह राज्य इस देश में एक नंबर पर होता। लेकिन कोई बात नहीं, हम आगे बढ़कर, मिलकर इस युवा राज्य को समृद्ध बनायेंगे।
श्री सोरेन ने कहा, कोयला को लेकर दुनिया में धनबाद अलग स्थान रखता है। यहां पर जितनी पब्लिक कंपनिया हैं, आउटसोर्स के माध्यम से यह प्राइवेट कंपनियों को घुसा कर बाहर से लोग मजदूर के रूप में लाने लगे हैं। उन्हें लगता है कि लोकल लोगों को रखेंगे तो आंदोलन होगा। लेकिन याद रखियेगा आपको 75% स्थानीय को रखना ही होगा, नहीं तो अपना हक-अधिकार जरूर लिया जाएगा।
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