नयी दिल्ली , दिसंबर 19 -- केंद्रीय आदिवासी कार्य मंत्री जुएल ओराम के नेतृत्व में गुरुवार को देशभर के जनजातीय मंत्रियों और सांसदों की एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का उद्देश्य देश के आदिवासी समुदायों के समग्र, समावेशी और तेज़ विकास सुनिश्चित करना है।
बैठक में आदिवासी क्षेत्रों में चल रही योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई।
श्री ओराम ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि यह संवाद जनजातीय नेतृत्व की साझा जिम्मेदारी और एकजुट सोच को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास के विज़न (दृष्टिकोण) पर काम कर रही है, जिसमें आदिवासी समाज की भागीदारी और सम्मान सर्वोपरि है।
श्री ओराम ने कहा कि जनजातीय सांसद केवल नीति निर्धारण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि योजनाओं के सही क्रियान्वयन और अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने में भी उनकी अहम भूमिका है। उन्होंने बताया कि सरकार की कई राष्ट्रीय योजनाएं आदिवासी और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।
बैठक में पीएम-जनमन योजना, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, और वन अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया। इन योजनाओं के माध्यम से आदिवासी क्षेत्रों में आवास, स्वच्छ पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, आजीविका और सांस्कृतिक संरक्षण को मजबूती मिली है।
श्री ओराम ने आदिवासी बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा, सिकल सेल बीमारी की रोकथाम, वन धन योजना के जरिए रोज़गार के अवसर बढ़ाने और समुदायों को वन अधिकार प्रदान कर सशक्त बनाने पर भी बल दिया।
इस अवसर पर जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके, सांसद सवित्री ठाकुर, उमेशभाई पटेल, सुखदेव भगत, राजकुमार रोत, मनोज टिग्गा, अमरसिंह तिस्सो सहित ओडिशा, झारखंड, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, असम और अन्य राज्यों के कई जनजातीय सांसद मौजूद रहे।
बैठक में जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा, संयुक्त सचिव अनंत प्रकाश पांडे, अतिरिक्त सचिव मनीष ठाकुर, नेस्ट्स के आयुक्त अजीत कुमार श्रीवास्तव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित