पटना , दिसंबर 24 -- राजधानी पटना में आयोजित सरस मेले में गया जी जिले से आई जीविका दीदी पुष्पलता का नीरा से बना व्यंजन लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

दीदी पुष्पलता के स्टॉल पर लोगों को बोधगया के नीरा से बने लड्डू, पेड़ा और तिलकूट का अनोखा स्वाद चखने को मिल रहा है। लोगों ने गुड़ या चीनी से बना तिलकुत देखा और चखा है, लेकिन नीरा से बना यह उत्पाद बेहद अलग हैं और लोगों का ध्यान सहज ही अपनी तरफ आकर्षित कर रहा है।

इस स्टॉल पर दीदी के सहयोगी डब्लू ने बताया कि 'लोगों के मन में गलत धारणा है कि नीरा नशीला प्रदार्थ है। नीरा स्वास्थ्य के लिये बेहद लाभदायक है। हमारी स्थायी दुकान गया जी जिले के बोधगया में बौद्ध मंदिर के पास स्थित है। सरस मेला में रोजाना हमारे स्टॉल से 10- 20 हजार रुपये तक का लड्डू, पेड़ा और तिलकूट बिक रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिक्री के लिए लाये गये उत्पाद की सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें किसी तरह की चीनी का उपयोग नहीं होता है।'उन्होंने कहा कि इस अनोखे उत्पाद की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी 16 अप्रैल, 2022 को दुकान पर आये और इसके जायके का मजा लिया। उन्होंने बताया किमुख्यमंत्री पुष्पलता दीदी के बनाये उत्पादों को देखकर बेहद खुश हुये थे। 21 जनवरी, 2023 को मुख्यमंत्री ने दोबारा उनके द्वारा बनाये उत्पादों की जानकारी भी ली थी।

जीविका दीदी पुष्पलता ने बताया कि 'लोग हमारे प्रोडक्ट को काफी पसंद करते हैं। बोधगया आने वाले थाईलैंड और जापान के लोग भी इन्हें खरीदकर बड़ी संख्या में अपने साथ ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे उत्पादों की पहुंच जापान और थाईलैंड तक पहुंच गई है।'उपलब्ध आंकड़ो के अनुसार इस वर्ष 11 दिसंबर से चल रहे बिहार सरस मेले में 21 दिसंबर तक 12 करोड़, 70 लाख रुपये से अधिक की खरीदारी हो चुकी है। ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने में सरस मेला सबसे बड़ा मंच साबित हो रहा है। साथ ही अब तक दो लाख से अधिक आगंतुक सरस मेला में उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं।

सरस मेला के शुरू होते ही पहले तीन दिनों में ही दो करोड़, 25 लाख रुपये का कारोबार कर लिया था, जो नया कीर्तिमान है। मेले में जीविका दीदियों की तरफ से लगाये गये 500 से अधिक स्टॉल मेला देखने आये सभी आगंतुकों के लिये एक अलग अनुभव देते हैं। मेले में महिलाओं और पुरुषों को बिहार सरकार की लोक कल्याणकारी योजनाओं की भी जानकारी दी जा रही है। यहां मनोरंजन के लिये 25 राज्यों की लोक- संस्कृति, परंपरा, हुनर, स्वाद की अनोखी झलक भी देखने को मिलती है।

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