नयी दिल्ली , फरवरी 27 -- सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) सूचकांक की नयी श्रृंखला के अनुसार शुक्रवार को जारी पहले अनुमान में चालू वित्त वर्ष में स्थिर कीमतों में वृद्धि 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो जनवरी के पहले सप्ताह में घोषित पहले पूर्वानुमान के 7.4 प्रतिशत की तुलना में अधिक है।

सरकार ने नये आधार वर्ष (2022-23) पर पहली बार जीडीपी के आंकड़े जारी किये हैं। इसके अनुसार, वर्तमान कीमतों पर वार्षिक वृद्धि 8.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है।

इस बार बजट से पहले पेश आर्थिक सर्वेक्षण में 2025-26 की वास्तविक आर्थिक वृद्धि दर के 6.8 प्रतिशत से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान लगाया गया था।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा आज जारी दूसरे अग्रिम अनुमानों के अनुसार चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2025) के दौरान स्थिर कीमतों पर जीडीपी वृद्धि 7.8 प्रतिशत रही।

आंकड़ों के अनुसार, तीसरी तिमाही में विनिर्माण की वृद्धि दर 13.3 प्रतिशत रही। इसके अलावा सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर 9.5 प्रतिशत दर्ज की गयी। वहीं, कृषि क्षेत्र में 1.4 प्रतिशत की दो साल की सबसे सुस्त वृद्धि देखी गयी।

पूरे चालू वित्त वर्ष में विनिर्माण क्षेत्र में 11.5 प्रतिशत और सेवा क्षेत्र में नौ प्रतिशत की दर से वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर का अनुमान 2.4 प्रतिशत है।

चालू वित्त वर्ष में पहली तिमाही में अनुमानित जीडीपी वृद्धि 6.7 प्रतिशत, दूसरी में 8.2 प्रतिशत थी।

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने दूसरे अग्रिम अनुमानों के जारी किये जाने के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि चालू वित्त वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही (जनवरी- मार्च 2026) में जीडीपी वृद्धि 7.3 प्रतिशत या उससे अधिक रहेगी और तभी पूरे साल की वृद्धि 7.6 प्रतिशत पर पहुंचेगी।"उन्होंने त्वरित अंतराल के बाद आने वाले जनवरी 2026 के वृहद आर्थिक आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा, "अर्थव्यवस्था में स्वस्थ वृद्धि के संकेत बने हुए हैं।"भारतीय अर्थव्यवस्था ने 2023-24 और 2024-25 में क्रमश: 7.2 और 7.1 प्रतिशत की मजबूत दर से वृद्धि दर्ज की है और विश्व की सबसे तीव्र गति से बढ़ रही प्रमुख अर्थव्यवस्था है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, इन दोनों वर्षों में वर्तमान कीमतों पर जीडीपी क्रमश: 11 प्रतिशत ओर 9.7 प्रतिशत की दर से बढ़ी है।

ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि लगातार तीन वित्त वर्ष से विनिर्माण क्षेत्र अर्थव्यवस्था के मजबूत प्रदर्शन में योगदान करने वाला प्रमुख क्षेत्र बना हुआ है।

चालू वित्त वर्ष में तृतीयक क्षेत्र (सेवा क्षेत्र) में नौ प्रतिशत से अधिक की वृद्धि का अनुमान है। व्यापार, मरम्मत, होटल, परिवहन, संचार एवं प्रसार से जुड़ी सेवाएं और भंडारण सेवा क्षेत्र में स्थिर कीमतों में वृद्धि चालू वित्त वर्ष में 10.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

चालू वित्त वर्ष में निजी वित्तीय उपभोग व्यय (पीएफसीई) और सकल स्थिर पूंजी निर्माण (जीएफसीएफ) में 2025-26 के दौरान वृद्धि 7.0 प्रतिशत से ऊपर रहने का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार चालू वित्त वर्ष में सरकारी वित्तीय उपभोग व्यय 6.6 प्रतिशत और निजी उपभोग व्यय 7.7 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। वहीं, सकल स्थायी पूंजी निर्माण में 7.1 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है।

चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के दौरान सरकारी उपभोग व्यय सालाना आधार पर 4.7 प्रतिशत और निजी उपभोग व्यय 8.7 प्रतिशत बढ़ा है। साथ ही सकल पूंजी निर्माण 7.8 प्रतिशत बढ़ा है।

नये आधार वर्ष पर अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, तीसरी तिमाही में स्थिर कीमतों पर जीडीपी 84.54 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है जबकि पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में जीडीपी 78.41 लाख करोड़ रुपये रहा था। पूरे वित्त वर्ष में स्थिर कीमत पर जीडीपी के 322.58 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया गया है जो 2024-25 के 299.89 लाख करोड़ की तुलना में 7.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

पुरानी सीरीज पर जनवरी में जारी पहले अग्रिम अनुमान में 2025-26 में जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने की बात कही गयी थी। नयी सीरीज के हिसाब से वित्त वर्ष 2023-24 में वास्तविक जीडीपी 7.2 प्रतिशत और 2024-25 में 7.1 प्रतिशत बढ़ा था।

नये आधार वर्ष के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में वर्तमान कीमतों पर जीडीपी 345.47 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है जो वर्ष 2024-25 के 318.07 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 8.6 प्रतिशत अधिक है।

चालू वित्त वर्ष में अनुमानित वास्तविक सकल मूल्यवर्धन जीवीए (जीडीपी में उत्पादों पर कर को घटाकर और सब्सिडी को जोड़कर प्राप्त आंकड़ा) 294.40 लाख करोड़ रुपये रहेगा जो पिछले वित्त वर्ष के 273.36 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 7.7 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है। वर्तमान कीमत पर चालू वित्त वर्ष का जीवीए 8.7 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 313.61 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है।

श्री नागेश्वरन ने शुक्रवार को कहा कि देश की अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रही है और अगले वित्त वर्ष (2026-27) में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में सात से 7.4 प्रतिशत के बीच वृद्धि की संभावना है।

उन्होंने कहा कि रबी फसलों की अच्छी बुवाई हुई है, देश में अनाज का पर्याप्त भंडार है और वैश्विक स्तर पर कॅमोडिटी के मूल्यों में नरमी है। कुल मिलाकर आपूर्ति पक्ष की परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं जिससे मुद्रास्फीति में नरमी आगे भी जारी रहने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि पूंजीगत निवेश से समझौता किये बिना सरकार ने वित्तीय अनुशासन बनाये रखा है। संशोधित अनुमानों के अनुसार, नयी सीरीज के जीडीपी की तुलना में राजकोषीय घाटे के 4.5 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है।

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