नयी दिल्ली , जनवरी 29 -- लोकसभा में गुरूवार को पेश हुए आर्थिक सर्वे 2024-25 के अनुसार बीते साल अप्रैल-दिसंबर की अवधि में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का कुल संग्रह 17.4 लाख करोड़ रुपये रहा है और साथ ही इस सर्वेक्षण में जीएसटी संबंधी ई-वे बिल और ई -सील को और अधिक मजबूत बनाने का संकेत दिया गया है।

सर्वे के अनुसार जीएसटी वसूली के मद में साल दर साल के आधार पर 6.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी है। साल 2017 में पंजीकृत करदाताओं की संख्या लगभग 60 लाख थी, जो अब बढ़कर 1.5 करोड़ से अधिक हो गई है। यही नहीं अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान ई-वे बिल की संख्या में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

सर्वे में बार-बार की चेकिंग को खत्म करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक सील (ई-सील), गाड़ी की ट्रैकिंग और ई-वे बिल के डिजिटल एकीकरण का सुझाव दिया गया है। इससे एंड-टू-एंड सुरक्षित ट्रैकिंग संभव होगी और समय व लागत में कमी आएगी। इंटीग्रेटेड ई-सील और इलेक्ट्रॉनिक लॉकिंग सिस्टम का ज़्यादा इस्तेमाल से कर संग्रह में आसानी होगी।

गौरतलब है कि ई-वे बिल एक ऑनलाइन तरीके से बनने वाला दस्तावेज है। इसे तब बनाते हैं कारोबारी एक सामान को एक जगह से दूसरी जगह भेजता है। अगर सामान की कीमत तय सीमा से अधिक है, तो सामान रवाना करने से पहले ई-वे बिल बनाना अनिवार्य होता है। इस बिल में यह जानकारी दर्ज रहती है कि सामान कौन भेज रहा है, किसे भेजा जा रहा है, माल क्या है, उसकी मात्रा कितनी है और वह किस रास्ते से पहुंचेगा। यानी ई-वे बिल सरकार के लिए एक डिजिटल निगरानी व्यवस्था है। इसके जरिए यह पता लगता है कि देश में सामान की आवाजाही कहां से कहां हो रही है और उस पर सही तरीके से कर दिया जा रहा है या नहीं।

सर्वे में कहा गया है कि जीएसटी के दूसरे चरण के सुधार से जीएसटी दरों के युक्ति संगत होने से कर का बोझ कम होने और मांग बढ़ने की उम्मीद है।

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