मुंबई , मार्च 23 -- महाराष्ट्र में पिछले सप्ताह सतारा जिला परिषद के अध्यक्ष पद के चुनाव के दौरान हुए हंगामे के कारण सोमवार को राज्य विधान मंडल में भारी बवाल हुआ और यह मुद्दा विधान परिषद में तीखी बहस में बदल गया।

परिषद की सभापति नीलम गोरे ने इन घटनाक्रमों का गंभीर संज्ञान लेते हुए सतारा के पुलिस अधीक्षक तुषार दोषी को तत्काल निलंबित करने का निर्देश दिया।

सुश्री नीलम गोरे ने यह निर्देश सदस्यों के चुनाव प्रक्रिया के दौरान स्थिति को संभालने के तरीके पर कड़ी आपत्ति जताए जाने के बाद दिया। विवाद तब और गहरा गया जब शिवसेना के शिंदे गुट के नेताओं ने आक्रामक रुख अपनाया, जिसके चलते सभापति को हस्तक्षेप करना पड़ा।

शिवसेना (एकनाथ शिंदे) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार) ने चुनाव के लिए गठबंधन किया था और जिला परिषद में उनके पास बहुमत था, लेकिन कथित तौर पर पुलिस के पक्षपातपूर्ण भूमिका निभाने, कुछ सदस्यों को मतदान से रोकने और स्थिति को अनियंत्रित होने देने के कारण भारतीय जनता पार्टी का उम्मीदवार विजयी हुआ।

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने घटनाओं के क्रम को रेखांकित किया और पुलिस के आचरण पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक एक दिन पहले दो मतदाताओं के खिलाफ कई साल पुराने मामले दर्ज किए गए थे, ताकि उन्हें वोट डालने से रोका जा सके। श्री शिंदे ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से पुलिस अधीक्षक और पुलिस महानिदेशक से संपर्क किया था और उन्हें निर्देश दिया था कि मतदाताओं को अपने मताधिकार का प्रयोग करने दिया जाए और मतदान के बाद ही कोई कार्रवाई की जाए।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित