नैनीताल , दिसंबर 29 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में हिंसा और बवाल के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार को पुलिस महानिदेशक को लापरवाह पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अनुशानात्मक कार्रवाई करने को कहा है।
मुख्य न्यायाधीश जी0 नरेंदर और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में स्वतः संज्ञान वाली इस जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। पुलिस महानिदेशक अभिनव कुमार आज अदालत में वर्चुअल पेश हुए।
उन्होंने अदालत को बताया कि इस मामले की जांच सीबीसीआईडी कर रही है। विभिन्न बिन्दुओं पर जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस मुख्यालय से समयबद्ध जांच के निर्देश दिये गये हैं।
अधिवक्ता एके रावत की ओर से कहा गया कि सीबीसीआईडी के आईजी अरूण मोहन जोशी को सरकार ने पद से हटा दिया है। सरकार इस मामले में लीपापोती करना चाहती है।
हालांकि श्री कुमार ने कहा कि जल्द ही नयी नियुक्ति की जायेगी और आईजी की निगरानी में जांच की जायेगी। महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर ने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर भी जांच की जा रही है और जांच की जिम्मेदारी कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत को सौंपी गयी है।
अंत में अदालत ने कहा कि वह इस मामले में जल्द आदेश पारित करेंगे और डीजीपी को निर्देश दिये कि वह इस मामले को देखें और लापरवाही बरतने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करें।
यहां बता दें कि 14 अगस्त को हुए जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के मध्य हिंसक झड़प हो गयी थी। इस दौरान पांच जिला पंचायत सदस्यों के अपहरण का भी आरोप है। कांग्रेस नेताओं की शिकायत पर हाईकोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दायर कर ली थी।
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