श्रीगंगानगर , अप्रैल 06 -- राजस्थान में श्रीगंगानगर जिला न्यायालय परिसर पर कथित आतंकी हमले की धमकी वाले फर्जी पत्र के मामले में पुलिस एक संदिग्ध वकील के खिलाफ सुबूत नहीं होने से कार्रवाई नहीं कर पा रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार इस फर्जी पत्र को भेजने वाला व्यक्ति अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है जबकि उसके पीछे पश्चिम बंगाल के वर्धमान का एक वकील मुख्य संदिग्ध बनकर उभरा है। स्थानीय लोगों और बार संघ ने भी इस वकील की पुरानी सिरफिरी हरकतों का जिक्र करते हुए उस पर शक जताया है, लेकिन ठोस सबूत न मिलने के कारण श्रीगंगानगर पुलिस के साथ-साथ गोरखपुर और दिल्ली पुलिस भी उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नही कर रही है।

श्रीगंगानगर में जिला न्यायालय को यह धमकी भरा पत्र स्पीड पोस्ट के जरिए 10 मार्च को प्राप्त हुआ था। पत्र दो मार्च को वर्धमान के राजाराम मोहन राय मार्ग स्थित डाक कार्यालय से प्रेषित किया गया था। यहां जिला न्यायालय के कार्यालय में पत्र को 12 मार्च को खोला गया और 14 मार्च को जिला पुलिस को इसकी सूचना दी गई। इसके बाद 19 मार्च को न्यायालय के एक कर्मचारी की शिकायत पर कोतवाली थाने में मामला दर्ज किया गया।

सूत्रों ने बताया कि पत्र कंप्यूटर से अंग्रेजी में टाइप किया गया था जिसमें बम से उडाने की धमकी दी गयी थी। पत्र के नीचे एक गोलाकार स्टैंप लगा था जिस पर भौमिक शाह के नाम से अंग्रेजी हस्ताक्षर किए हुए थे। यह स्टैंप कोलकाता और वर्धमान में साड़ियों का बड़ा व्यापार करने वाली एक प्रतिष्ठित फर्म की बताई है, लेकिन जांच में स्टैंप और हस्ताक्षर दोनों ही पूरी तरह फर्जी पाए गए।

पत्र पर लगी डाक विभाग की मोहर के आधार पर श्रीगंगानगर पुलिस की टीम 22 मार्च को वर्धमान पहुंची। राजाराम मोहन राय मार्ग स्थित डाक कार्यालय में सीसीटीवी कैमरे लगे थे, लेकिन पुलिस को पता चला कि वहां की रिकॉर्डिंग केवल 12 दिन तक ही सुरक्षित रखी जाती है और उसके बाद स्वत: मिट जाती है। पत्र दो मार्च को भेजा गया था इसलिए 22 मार्च को पहुंचने तक सारी रिकॉर्डिंग गायब हो चुकी थी।

वर्धमान पहुंचकर पुलिस ने फर्म के संचालकों से पूछताछ की। फर्म मालिकों ने साफ कहा कि न तो स्टैंप उनकी फर्म का है और न ही हस्ताक्षर भौमिक शाह के। पूछताछ के दौरान स्थानीय लोगों ने स्वतः ही एक स्थानीय वकील का नाम लिया और कहा कि यह उसी की हरकत हो सकती है क्योंकि वह ऐसी सिरफिरी हरकतें पहले भी कर चुका है।

इस वकील पर शक और भी मजबूत हो गया जब पता चला कि उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में भी इसी तरह की हरकत हुई थी। गोरखपुर पुलिस के एटीएस विंग के अधिकारी जांच के तहत वर्धमान पहुंचे थे, लेकिन उन्हें भी कोई सुबूत नहीं मिला।

सूत्रों के मुताबिक वर्धमान बार संघ ने ऐसी हरकतों के चलते इस वकील को बार संघ की सदस्यता से बाहर कर दिया है।

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