लखनऊ/ गौतमबुद्धनगर , अप्रैल 15 -- उत्तर प्रदेश के नोएडा में श्रमिकों के उपद्रव के बाद शासन के दिशा निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से जिलाधिकारी की अध्यक्षता में विभिन्न औद्योगिक इकाइयों की आउटसोर्सिंग एजेंसियों एवं संविदाकारों के साथ महत्वपूर्ण बैठक बुधवार को आयोजित की गई।

बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि आउटसोर्सिंग एजेंसियां उद्योग संचालन और रोजगार सृजन में अहम भूमिका निभाती हैं, इसलिए उन पर अपने कार्मिकों और श्रमिकों के व्यवहार तथा कार्यप्रणाली की जिम्मेदारी भी समान रूप से है।

उन्होंने निर्देश दिया कि यदि किसी एजेंसी या उसके कार्मिकों द्वारा उपद्रवी गतिविधि की जाती है, तो संबंधित एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करते हुए उसका लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है।

जिलाधिकारी ने सभी संविदाकारों को शासन द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए।

उन्होंने न्यूनतम वेतन का उल्लेख करते हुए बताया कि अकुशल श्रमिकों के लिए 13,690, अर्धकुशल के लिए 15,059 तथा कुशल श्रमिकों के लिए 16,868 प्रतिमाह वेतन निर्धारित है।

उन्होंने कहा कि सभी श्रमिकों को निर्धारित वेतन सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित किया जाए और किसी भी प्रकार का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि उद्योग, श्रमिक और नियोजक तीनों एक-दूसरे के पूरक हैं। उद्योगों का सुचारु संचालन रोजगार की स्थिरता सुनिश्चित करता है, जबकि नियोजकों की मजबूती से श्रमिकों का भविष्य सुरक्षित रहता है। औद्योगिक गतिविधियों में बाधा आने पर इसका नकारात्मक प्रभाव प्रदेश के समग्र विकास पर पड़ता है।

जिलाधिकारी ने सभी पक्षों से अपील की कि किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रामक सूचना पर ध्यान न दें और आपसी सहयोग व विश्वास के साथ कार्य करते हुए औद्योगिक शांति बनाए रखें।

उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार श्रमिकों और नियोजकों दोनों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी समस्या के समाधान के लिए प्रशासन तत्पर है।

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