नैनीताल , अप्रैल 03 -- उत्तराखंड के रामनगर क्षेत्र के ढेला बंदोबस्ती गांव में जाति छिपाकर भूमि बेचने का मामला सामने आने पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी नैनीताल की अदालत ने 1.170 हेक्टेयर भूमि को राज्य सरकार में निहित करने के आदेश दे दिये।
प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 1993 में अनुसूचित जाति के व्यक्तियों द्वारा बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के सामान्य वर्ग के व्यक्ति को भूमि बेची गई थी। जांच में सामने आया कि विक्रय विलेख (बैनामा) और मुख्तारनामे में विक्रेताओं की जाति का उल्लेख नहीं किया गया था।
"सरकार बनाम सीताराम आदि" प्रकरण की जांच के दौरान यह भी पाया गया कि वर्ष 2013 में विक्रेताओं में से एक का अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र जारी हुआ था तथा परिवार रजिस्टर में भी संबंधित परिवार अनुसूचित जाति श्रेणी में दर्ज है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि उच्चतम न्यायालय के विभिन्न निर्णयों के अनुसार व्यक्ति की जाति जन्म से तथा पिता के आधार पर निर्धारित होती है। इस आधार पर विक्रेताओं को अनुसूचित जाति का मानते हुए बिना अनुमति किया गया भूमि विक्रय अवैध घोषित किया जाता है।
जिलाधिकारी रयाल ने इस कृत्य को उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम (यूपीजेडएएलआर एक्ट) की धारा 157 का उल्लंघन मानते हुए संबंधित भूमि को राज्य सरकार में निहित करने के आदेश दे दिए हैं।
अदालत ने उपजिलाधिकारी रामनगर को निर्देशित किया है कि आदेश का तत्काल राजस्व अभिलेखों में अंकन कराया जाए और भूमि का कब्जा राज्य सरकार के पक्ष में सुनिश्चित किया जाए।
प्रशासन की इस कार्रवाई को अवैध भूमि हस्तांतरण के खिलाफ एक अहम कदम माना जा रहा है।
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