नयी दिल्ली , जनवरी 26 -- कांग्रेस ने कहा है कि सरकार को इस प्रस्तावित जनगणना में जाति गणना की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने से पहले सभी राजनीतिक दलों, राज्य सरकारों और नागरिक संगठनों से बातचीत करने की मांग की है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोमवार को सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि बिना व्यापक सलाह-मशविरा के जाति गणना कराना न तो निष्पक्ष होगा और न ही सामाजिक न्याय के उद्देश्य को पूरा करेगा। उनका कहना था कि जनगणना 2027 के पहले चरण में घरों की सूची और घरों की गणना का काम इस साल अप्रैल से सितंबर के बीच होगा जबकि दूसरे चरण में जनसंख्या गणना बर्फ़ीले क्षेत्रों में सितंबर 2026 और देश के शेष हिस्सों में फरवरी 2027 में प्रस्तावित है। जन गणना के दूसरे चरण में जाति गणना कराए जाने की घोषणा की गई है।

उन्होंने मोदी सरकार को याद दिलाया कि 30 अप्रैल 2025 को यू-टर्न लेते हुए जाति गणना को जनगणना में शामिल करने की घोषणा की, जबकि इससे पहले सरकार लगातार इसका विरोध करती रही। श्री रमेश ने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल 2024 में जाति जनगणना की मांग को 'अर्बन नक्सल मानसिकता' बताया था।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया है कि हाल ही में अधिसूचित घरों की सूची तैयार करने की योजना के प्रश्न 12 में केवल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और 'अन्य' का उल्लेख है, जबकि ओबीसी और सामान्य वर्ग को स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया गया है। सरकार का यह कदम उसकी नीयत और व्यापक, निष्पक्ष तथा देशव्यापी जाति गणना के लिए उसकी प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने कहा कि तेलंगाना सरकार ने द्वारा 2025 में कराया गया एसईईईपीसी सर्वे शिक्षा, रोजगार, आय और राजनीतिक भागीदारी से जुड़ा जाति-वार आंकड़ा जुटाने का सबसे व्यापक और प्रभावी मॉडल है, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर अपनाया जाना चाहिए।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित