लखनऊ/मेरठ , जनवरी 31 -- सामाजिक समरसता, संवैधानिक मूल्यों और मानवीय गरिमा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से सनातन संगम न्यास की एसवीएसयू इकाई, स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ द्वारा अंतर्जातीय एवं अंतर्मतीय विवाह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री (आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स) सुनील शर्मा उपस्थित रहे, जबकि अध्यक्षता भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष विनीत अग्रवाल शारदा ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ सुभारती सनातन मंत्र के उच्चारण एवं सनातनी ज्योति प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। मंच पर कवि डॉ. हरिओम पंवार, मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. शल्या राज तथा इकाई अध्यक्ष डॉ. प्रदीप राघव सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
श्री शर्मा ने कहा कि जातीय विभाजन दुर्भाग्यपूर्ण है और राजनीतिक स्वार्थों के कारण समाज को बांटा गया है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म आत्मसुधार और कुरीतियों को त्यागने की प्रेरणा देता है। यह कार्यक्रम सनातन के मूल भाव को आगे बढ़ाने का प्रयास है। वहीं कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सनातन संगम न्यास व सुभारती समूह के संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण ने कहा कि जातिविहीन समाज के निर्माण के लिए जातीय बंधनों को तोड़ना आवश्यक है। उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि सामाजिक समरसता और समानता ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला है। उन्होंने अतीत में हुए सामाजिक भेदभाव को स्वीकार करते हुए आपसी क्षमा और समावेश की भावना को बढ़ावा देने पर बल दिया।
कार्यक्रम अध्यक्ष विनीत अग्रवाल शारदा ने इसे सामाजिक परिवर्तन की दिशा में सराहनीय पहल बताया। सुभारती विश्वविद्यालय के महानिदेशक मेजर जनरल (डॉ.) जी.के. थपलियाल (सेनि.) ने कहा कि प्राचीन काल में अंतर्जातीय विवाह स्वीकार्य थे और आज विकसित भारत के निर्माण के लिए युवाओं को सामाजिक बंधनों से ऊपर उठकर समरस समाज की दिशा में आगे बढ़ना होगा। डॉ. प्रदीप राघव ने बताया कि न्यास सहभोज, उपनाम हटाने, सहधर्माचरण, अंतर्जातीय एवं अंतर्मतीय विवाह को प्रोत्साहन और समाज के वंचित वर्गों को आगे लाने जैसे चार सूत्रीय कार्यक्रमों पर कार्य करता है।
समारोह में सामाजिक एकीकरण उत्कृष्टता सम्मान, सामाजिक परिवर्तन के मार्गदर्शक सम्मान एवं मधुहरे सम्मान प्रदान किए गए। सामाजिक एकीकरण उत्कृष्टता सम्मान के अंतर्गत 21 दंपत्तियों को सम्मानित किया गया, जिनमें विश्वविद्यालय के अनेक संकाय सदस्य शामिल रहे।
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