भीलवाड़ा , दिसंबर 29 -- पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण संस्था पीपल फॉर एनीमल्स (पीएफए) के प्रदेश प्रभारी एवं पर्यावरणविद् बाबू लाल जाजू ने उच्चत्तम न्यायालय के अरावली पर्वतमाला के संबंध में दिये निर्णय का स्वागत करते हुए इसे अरावली संरक्षण की दिशा में एक जरूरी और सकारात्मक कदम बताया हैं।

श्री जाजू ने सोमवार को अपने बयान में न्यायालय के इस निर्णय को स्वागत योग्य बताया। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि देशभर में अरावली की कटाई और अवैध खनन को लेकर जन आक्रोश के दबाव में केंद्र सरकार ने खनन पर रोक की केवल औपचारिक घोषणा की थी जबकि जमीनी हकीकत यह है कि न तो अवैध खनन रुका और न ही अरावली की पहाड़ियां सुरक्षित हुईं।

श्री जाजू ने सवाल उठाया कि अरावली की पहाड़ी नौ मीटर की हो या 99 मीटर की, उसे काटने की अनुमति आखिर क्यों दी जाये। यह प्रकृति विनाश को खुली छूट देने जैसा है। उन्होंने चेताते हुए कहा कि अरावली के निरंतर विनाश से भूजल स्तर गिर रहा है, जैव विविधता नष्ट हो रही है और जलवायु संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे भविष्य में भूकंप जैसी आपदाओं का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार के अरावली की नयी परिभाषा से केवल 0.19 प्रतिशत क्षेत्र प्रभावित होने के दावे को भ्रामक करार देते हुए अरावली की पुरानी परिभाषा यथावत रखी जाने और खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाये जाने की मांग की।

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