अमरोहा , दिसंबर 21 -- भारतीय किसान यूनियन संयुक्त मोर्चा राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने कहा कि ज़मीनी पानी में ज़हर मत घोलो, हमारी फसलों और नस्लों को मत मारो।

उत्तर प्रदेश के अमरोहा के गजरौला क्षेत्र में ज़हरीले रासायनिक पानी व वायु प्रदूषण के खिलाफ़ युद्ध का ऐलान करते हुए ग्रामीणों ने बसैली गांव में रविवार को अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू किया।

स्थानीय ग्रामीण नबी अहमद ने रविवार को बताया कि अमरोहा जिले के गजरौला ब्लॉक क्षेत्र के गांव बसैली, शहबाजपुर डोर, रसूलपुर, फाजलपुर गोसाईं तथा तिगरिया भूड़ में बड़े पैमाने पर वायु व भूगर्भ जल प्रदुषित होने से आसपास के गांवों में रहस्यमई बीमारियों की चपेट में आने से बच्चे, बूढ़े और महिलाओं की असामायिक मृत्यु हो चुकी हैं। कुछ को चिकित्सकों द्वारा लाइलाज घोषित कर घर वापस भेज दिया गया है।

इस संबंध में ग्रामीणों ने जिम्मेदार नेताओं और अफसरों से गुहार भी लगाई, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने भारतीय किसान यूनियन संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी को आपबीती सुनाई। किसान नेता ने किसानों की आवाज उठाने का आश्वासन दिया। और इस संबंध में जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स से कार्यालय में मिलकर प्रभावित गांवों के वायु व भूगर्भ जल की जांच कराने, लाइलाज बीमारियों की अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान संस्थान(एम्स )दिल्ली से विषेशज्ञों की टीम द्वारा चिकित्सीय परीक्षण कराने की मांग रखी थी।

जिलाधिकारी ने मामले की गंभीरता को समझते हुए प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड और जल निगम की टीम को जांच करने के निर्देश दिए। टीम द्वारा स्थलीय निरीक्षण कर पानी के नमूने लेकर लैब को भेज दिए हैं। आयुर्विज्ञान अनुसंधान संस्थान (एम्स) दिल्ली की टीम के गांव में नहीं पहुंचने पर आक्रोशित ग्रामीणों ने बसैली गांव में रविवार से अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया।

आंदोलनकारी किसानों को संबोधित करते हुए किसान नेता नरेश चौधरी ने कहा कि वायु और भूगर्भ जल प्रदूषण से लोगों का हाल बेहाल है। दिसंबर के बचे हुए नौ दिनों में भी प्रदूषण से राहत मिलने की संभावना नहीं है। बल्कि हालात और ख़राब हो सकते हैं।

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि गजरौला क्षेत्र के प्रदुषित वायु व भूगर्भ जल से बच्चों में केंसर जैसी ख़तरनाक बीमारियों का ख़तरा बढ़ रहा है, अजन्मे बच्चे गर्भ में सुरक्षित नहीं हैं, लाइलाज घोषित 18 वर्षीया शाइस्ता गांव में जिंदगी मौत के बीच झूल रही है। पिछले दो वर्षों में लगभग दस ग्रामीणों की मौत रहस्यमई बीमारी से हो चुकी है। जिम्मेदार खामोश हैं यह आपराधिक उदासीनता कही जानी चाहिए और संविधान का उल्लंघन भी, क्योंकि यह जीवन के अधिकार को ख़तरे में डालता है।

किसान नेता ने कहा कि ऐसे संवेदनशील प्रकरण में राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी स्पष्ट दिखती है। क्योंकि अभी समाप्त हुए संसद सत्र में प्रदूषण पर चर्चा के लिए समय तक नहीं निकाला गया, जबकि यह मुद्दा सूचिबद्ध था।सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह है कि प्रदूषण फैलाने वाली रासायनिक औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कठोर कदम नहीं उठाए गए और न ही उन्हें हटाया गया और न ही बंद किया गया। और न ही किसानों द्वारा अभी तक पाताल तोड़ जल प्रदूषण के विरुद्ध कोई संगठित और प्रभावी आंदोलन किया था जो स्थिति में बदलाव लाया जा सके।

इस अवसर पर मौजूद रहे राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी, राष्ट्रीय मुख्य सचिव अरुण सिद्धू, प्रदेश अध्यक्ष रामकृष्ण चौहान, जगदेब सिंह,जय करन सैनी, अंकुर चौधरी, चौधरी चरण सिंह, अब्दुल रशीद, दिलशाद मलिक,सुरेश सिंह,नबी चौधरी, मोनित कुमार, सुरेंद्र चौधरी, सुमर सिंह नहीम चौधरी, इरशाद चौधरी, साइने आलम, लक्की चौधरी, विशाल यादव, हेरी लामा, पुनीत चौधरी, सहदेव यादव, आशु यादव आदि किसान लोग मौजूद रहे।

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