धार , जनवरी 31 -- पानी के अपव्यय को रोकने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में मध्यपदेश में नगर पालिका धार ने एक अहम पहल की है। बड़े शहरों की तर्ज पर अब धार शहर में लिक्विड वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जाएगा, जिसके माध्यम से नालों से निकलने वाले गंदे पानी को शुद्ध कर दोबारा उपयोग के योग्य बनाया जाएगा। इस परियोजना पर करीब 33 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

नगर पालिका अधिकारियों के अनुसार इस ट्रीटमेंट प्लांट में नालों से आने वाले अपशिष्ट जल को वैज्ञानिक तरीके से ट्रीट किया जाएगा। शुद्ध किए गए पानी का उपयोग पीने के लिए नहीं, बल्कि फायर ब्रिगेड, उद्यानों की सिंचाई और अन्य गैर-पेय कार्यों में किया जाएगा। इससे शहर में पानी की बर्बादी रुकेगी और जल संरक्षण को मजबूती मिलेगी। परियोजना में लगभग 10 करोड़ रुपये केवल मशीनरी पर खर्च किए जाएंगे।

अधिकारियों ने बताया कि धार शहर की जनसंख्या एक लाख से कम होने के कारण वर्तमान में अंडरग्राउंड सीवरेज लाइन और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की व्यवस्था संभव नहीं है। ऐसे में लिक्विड वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की तरह ही कार्य करेगा और शहर के गंदे पानी के बेहतर प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण ट्रेंचिंग ग्राउंड में किया जाएगा, जिसके लिए नगर पालिका द्वारा टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पहले इस प्लांट को खारिया तालाब के पास प्रस्तावित किया गया था, लेकिन अब ट्रेंचिंग ग्राउंड में इसका निर्माण किया जाएगा। शहर के नालों का गंदा पानी खारिया तालाब क्षेत्र तक पहुंचता है, जहां से ट्रेंचिंग ग्राउंड तक करीब दो किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जाएगी, ताकि अपशिष्ट जल को प्लांट तक लाया जा सके।

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