पटना , जनवरी 21 -- िहार में जल परिवहन को और अधिक सुगम और किफायती बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है, जिसके तहत राष्ट्रीय अंतर्देशीय नौवहन संस्थान (निनि) अब पारंपरिक लकड़ी की नावों की जगह प्लास्टिक नावों का निर्माण करेगा। निनि के प्रोजेक्ट निदेशक इंद्रजीत सोलंकी ने बताया कि संस्थान ने इसकी तैयारियां पूरी कर ली हैं, वर्ष के अंत तक नाव निर्माण शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि यह जानकारी परिवहन एवं ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री श्रवण कुमार को दी गयी है ।
मंत्री श्री कुमार मंगलवार को गायघाट पहुंचे थे, जहां उन्होंने शिप रिपेयरिंग सुविधा और निनि का निरीक्षण किया।
मंत्री श्री कुमार ने गायघाट से दीघा घाट तक वाटर मेट्रो वेसल में सफर किया और जल मार्ग परिवहन एवं माल ढुलाई की संभावनाओं का अध्ययन किया। उन्होंने कहा कि नदी परिवहन रेल और सड़क की तुलना में काफी सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प है। जलमार्ग से बालू, सब्जियां और भारी सामान की ढुलाई आसान हो जाएगी, जिससे सड़क जाम और दुर्घटनाओं में कमी आएगी। वर्तमान में राज्य में दो रोपेक्स वेसल (एक पटना और एक भागलपुर में) संचालित हैं। 21 सामुदायिक जेटी भी है, जबकि 17 अतिरिक्त स्थानों पर नए सामुदायिक जेटी विकसित किए जाएंगे। इन जेटियों के पास हाट भी लगाए जा सकेंगे, जिससे ताजा फल-सब्जियां सीधे बेची जा सकें।
प्रोजेक्ट निदेशक ने बताया कि जलमार्ग से माल ढुलाई के लिए नए अंतर्राज्यीय टर्मिनल बनाए जाएंगे। इससे भागलपुर-विराटनगर के बीच व्यापार बढ़ेगा। पड़ोसी देश नेपाल से जलमार्ग के माध्यम से व्यापारिक गतिविधियों की संभावनाओं का अध्ययन भी चल रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार को कोलकाता और हल्दिया जैसे समुद्री बंदरगाहों से जोड़ने वाला राष्ट्रीय जलमार्ग-1 स्थानीय उत्पादों को विदेशी बाजारों तक पहुंच प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नदियों पर 1550 घाट हैं और 6600 से अधिक नावें पंजीकृत हैं।
मंत्री श्री कुमार ने निनि में सिम्युलेटर और ड्रेजिंग रूम का निरीक्षण किया, जहां जहाज संचालन की ट्रेनिंग दी जाती है। उन्होंने कहा कि ऐसी सुविधाएं रोजगार, हुनर और प्रतिभा विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन्हें और विकसित करने की जरूरत है।
निनि देश का पहला संस्थान है जो शिप प्रोफेशनल नाविकों को ट्रेनिंग देता है। इसे 2004 में स्थापित किया गया। यहां जहाज संचालन, सिविल, ड्रेजिंग और वेसल संबंधित नियम बनाए जाते हैं। पिछले पांच वर्षों में संस्थान ने 2300 से अधिक युवाओं को ट्रेनिंग दी है।
परिवहन मंत्री श्रवण कुमार शुक्रवार को कोच्चि में इनलैंड वाटरवेज डेवलपमेंट काउंसिल (आईडब्ल्यूडीसी) की तीसरी बैठक में भाग लेंगे। बैठक में बिहार में जलमार्ग से संबंधित संभावनाओं और समस्याओं पर चर्चा होगी। बैठक में पटना में शहरी जल मेट्रो का विकास ,दीघा घाट और कंगन घाट पर क्रूज टर्मिनलों का विकास,पटना में दो हाइब्रिड इलेक्ट्रिक कैटामरान की तैनाती,पटना में जहाज मरम्मत सुविधा, त्वरित खुलने वाले पोंटून तंत्र की स्थापना,सोन नदी राष्ट्रीय जलमार्ग-94 पर अंतर्देशीय जल परिवहन,मनिहारी में रो-रो और रो-पैक्स टर्मिनल,17 अतिरिक्त स्थानों पर सामुदायिक जेट्टी का विकास,सोनपुर के कालुघट पर लोजिस्टिक पार्क का आधारभूत संरचना का निर्माण के बारे में चर्चा होगी।इसके अलावा, जलवाहक योजना के तहत अनुदान के लिए राष्ट्रीय जलमार्ग-1 के लिए दूरी 300 किमी से घटाकर 100 किमी करने का प्रस्ताव है, जिससे शिप संचालकों को केंद्र सरकार की इस अनुदान योजना का लाभ मिल सके। जिससे बक्सर, कालूघाट, पटना/हाजीपुर, मोकामा, भागलपुर और साहिबगंज जैसे प्रमुख शहरों के बीच जल परिवहन को बढ़ावा मिलेगा।
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