पटना , मार्च 13 -- जल-जीवन-हरियाली अभियान का अवयव-2 गांवों में दुर्व्यवस्था के शिकार पारंपरिक जल संचयन स्रोत तालाब, पोखर, आहर और पइन के लिए आज वरदान बन चुका है।
बिहार में वर्ष 2019 से शुरू अभियान ने अंतिम सांस गिन रहे इन जलस्रोतों में प्राण फूंकने का काम किया है। अभियान का परिणाम आज राज्य भर में पानी से लबालब भरे तालाब-पोखर जैसे जलस्रोतों में पशु-पक्षियों के कलरव के रूप में देखा जा सकता है। इन पोखर और तालाब से ग्रामीण क्षेत्रों में न सिर्फ पीने की पानी की किल्लत खत्म हुई है, बल्कि किसानों की फसल सिंचाई के लिए भी एक नया विकल्प तैयार हो चुका है।
गौरतलब है कि आज से सात वर्ष पहले शुरू अभियान में अभी तक राज्य भर में 26 हजार 383 तालाब-पोखर का जीर्णोद्धार, नवनिर्माण किया जा चुका है। राज्य में सबसे अधिक वर्ष 2019-20 में सात हजार 137 तालाब-पोखर का जीर्णोद्धार किया गया। इसके बाद चार हजार 494 तालाब-पोखऱ का वर्ष 2020-21 में, चार हजार 419 तालाब-पोखर का वर्ष 2022-23 में, तीन हजार 624 तालाब-पोखर का वर्ष 2023-24 में, दो हजार 625 तालाब-पोखर का वर्ष 2021-22 में, दो हजार 474 तालाब-पोखर का वर्ष 2024-25 में और एक हजार 612 तालाब-पोखर का वर्ष 2025-26 में जीर्णोद्धार-नवनिर्माण किया गया।
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