बेंगलूर , फरवरी 08 -- केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि सरकार नारियल के बागानों के विकास और दलहन की पैदावार को बढ़ाने के लिए नए कदम उठा रही है।

श्री चौहान ने रविवार को यहां आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि नारियल कर्नाटक की विशेष पहचान है। लेकिन बीते समय में नारियल बागानों पर रोग और वायरस का असर बढ़ा है। कई पेड़ और बागान बहुत पुराने हो चुके हैं, जिससे उनकी पैदावार कम हो गई है। इस चुनौती को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार नारियल संवर्धन योजना प्रारंभ करने जा रही है। इस योजना के अंतर्गत पुराने और कम उपज देने वाले नारियल के पेड़ों की जगह बेहतर उपज देने वाले नए पौधों का रोपण किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि कर्नाटक में दलहन पैदावार बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार पल्स मिशन के अंतर्गत 25 बीज गांव विकसित करने के लिए पूरा सहयोग देगी। यही नहीं दलहन पैदावार वाले क्षेत्रों में 35 दाल मिलें स्थापित करने के लिए प्रति दाल मिल 25 लाख रूपये की सब्सिडी दी जाएगी। दलहन मिशन के अंतर्गत कर्नाटक को 191 करोड़ रूपये जारी कर दिए गए हैं और जल्द ही 154 करोड़ रूपये की राशि भी जल्द भेजी जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा, "हमारे लिए किसान राजनीति से ऊपर हैं। आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में हम कर्नाटक के किसानों की सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।"गौरतलब है कि कर्नाटक भारत में दलहन उत्पादन के मामले में एक प्रमुख राज्य है, विशेष रूप से अरहर और चना के क्षेत्र में इसका स्थान शीर्ष राज्यों में आता है। कर्नाटक अरहर का देश में दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। वित्त वर्ष 2024-25 में कर्नाटक का कुल राष्ट्रीय अरहर उत्पादन में लगभग 27.78 प्रतिशत हिस्सा रहा, जिसका कुल उत्पादन करीब 10 लाख टन रहने का अनुमान है। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के बाद कर्नाटक चने के प्रमुख उत्पादकों में शामिल है। कर्नाटक की कृषि भूमि के लगभग 29 प्रतिशत भाग पर दालों की खेती की जाती है।

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