भदोही , दिसंबर 27 -- अमेरिका द्वारा 50 प्रतिशत टैरिफ थोपे जाने के बाद भारतीय कालीन निर्यातक विश्व पटल पर नया बाजार तलाशने में युद्ध स्तर पर जुट गए हैं। इस कड़ी में जनवरी में जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में आयोजित होने वाले हिमटेक्स्टिल-2026 को निर्यातक एक बेहतर अवसर के रूप में देख रहे हैं।
कालीन निर्यात संवर्धन परिषद ( सीईपीसी) के उपाध्यक्ष असलम महबूब ने शनिवार को यहां यूनीवार्ता को बताया कि ट्रम्प टैरिफ ने भारतीय कालीनों के छोटे व मझोले निर्यातकों के कारोबार को लगभग पूरी तरह खत्म कर दिया है। इन परिस्थितियों में भारतीय कालीन निर्यातक अमेरिका से हटकर विश्व बाजार में कुछ नए कालीन आयातक देशों की तलाश में जुट गए हैं, ताकि अमेरिका के टैरिफ प्रभाव को निष्प्रभावी किया जा सके।
उन्होंने बताया कि एक दौर था जब अमेरिकी बाजार पर भारतीय कालीन निर्यातकों का खास दबदबा होता था, लेकिन ट्रंप प्रशासन द्वारा 50 प्रतिशत टैरिफ थोपे जाने के बाद समस्याएं काफी बढ़ी हैं। हालात कुछ ऐसे बने हैं कि कालीन नगरी में छोटे व मझोले कारोबारियों के कारखानों पर ताले लटकने की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
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