नयी दिल्ली , फरवरी 02 -- समाचार पत्र-पत्रिकाओं के प्रकाशकों की राष्ट्रीय संस्था इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी (आईएनएस) ने जम्मू-कश्मीर में वहां के पत्रकारों को 'अकारण' पूछताछ के लिए बुलाये जाने की रिपोर्टों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि सरकारी अधिकारियों को मीडियाकर्मियों के साथ हर बातचीत में 'कानूनी प्रक्रिया का कड़ाई से अनुपालन' करना चाहिए।
आईएनएस ने पंजाब सरकार के अधिकारियों की ओर से उस क्षेत्र के अग्रणी अखबारों में एक 'पंजाब केसरी' के खिलाफ कार्रवाई पर गंभीर चिंता जताते हुए उसकी निंदा की है।
आईएनएस के अध्यक्ष विवेक गुप्ता ने इन मुद्दों पर सोमवार को दो अलग अलग बयान में इस बात पर बल दिया कि बोलने और अपनी बात रखने की स्वतंत्रता संविधान प्रदत्त है और लोकतंत्र में स्वतंत्र मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
श्री गुप्ता ने जम्मू-कश्मीर में मीडियाकर्मियों को उनकी सामान्य और तथ्यात्मक रिपोर्टों के बारे में पूछताछ के लिए मौखिक तौर पर बुलाए जाने पर चिंता जताते हुए कहा है कि इस तरह की बातों से पत्रकारिता की स्वतंत्रता प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को मीडिया के साथ व्यवहार करते समय कानूनी तरीके से ही चलना चाहिए। उन्होंने ऐसा वातावरण सुनिश्चित करने को कहा है जिसमें पत्रकार बिना दबाव के काम कर सकें।
पंजाब में अखबार पंजाब केसरी के खिलाफ कार्रवाई पर आईएनएस अध्यक्ष ने कहा है , 'यह देखने में आया है कि पंजाब में मीडिया प्रतिष्ठानों और उनसे जुड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर वहां के अधिकारियों ने एक के बाद एक विनियामकीय और प्रवर्तनकारी कारवाई की हैं। इनमें तरह तरह के बहाने में तलाशी और छापेखानों के निरीक्षण की कार्रवाई शामिल हैं। इन कार्रवाईयों को समाचार प्रकाशक (पंजाब केसरी ) ने सरकार के प्रति आलोचनात्मक सामग्री प्रकाशित करने वाले मीडिया पर दबाव की सतत कार्रवाई बताया है।'बयान में ऐसी रिपोर्टों का हवाला दिया गया है जहां पंजाब केसरी से जुड़े कुछ प्रतिष्ठानों की बिजली तक काट दी गयी । श्री गुप्ता ने कहा है, 'आईएनएस आर्थिक दबाव डालने वाली ऐसी कार्रवाई की भर्त्सना करती है क्योंकि इससे प्रतिष्ठान का दैनिक काम प्रभावित होता है।'आईएनएस ने इस मामले में उच्चतम न्यायालय से पंजाब केसरी अखबार को मिली राहत का स्वागत किया है जिसमें न्यायालय ने कहा है कि पंजाब केसरी की छपाई का काम बिना किसी व्यवधान के जारी रहेगा। बयान में कहा है कि मीडिया को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से दबाने की ऐसी कार्रवाइयां देश के लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित