श्रीनगर , अप्रैल 08 -- जम्मू-कश्मीर के नेताओं ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम का स्वागत किया है, जबकि घाटी और लद्दाख के कई हिस्सों में लोगों ने सड़कों पर उतरकर जश्न मनाया।
युद्धविराम की घोषणा के बाद कश्मीर घाटी और कारगिल में लोगों ने इसे "ईरान की जीत" बताते हुए नारे लगाए और कई स्थानों पर पटाखे जलाकर खुशी जतायी।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने युद्ध के परिणाम पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस 39 दिन के संघर्ष से अमेरिका को क्या हासिल हुआ। नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारुक अब्दुल्ला ने युद्धविराम का स्वागत करते हुए कहा कि युद्ध कभी समाधान नहीं होता और इससे केवल विनाश होता है। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष का असर जम्मू-कश्मीर के लोगों पर भी पड़ा है, खासकर उन परिवारों पर जो खाड़ी देशों में काम करने वालों की आय पर निर्भर हैं।
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने ईरान की "बहादुरी" की सराहना करते हुए कहा कि उसने अमेरिका और इजरायल को वार्ता की मेज पर आने के लिए मजबूर किया। उन्होंने युद्धविराम में पाकिस्तान की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने इस बात को दोहराया कि इस क्षेत्र में संघर्षों को सुलझाने और आगे की अस्थिरता को रोकने का एकमात्र व्यावहारिक रास्ता बातचीत ही है। महबूबा ने यह उम्मीद भी जताई कि पाकिस्तान और भारत किसी न किसी समय बातचीत शुरू करेंगे और मुद्दों को सुलझाएंगे।
हुर्रियत के अध्यक्ष मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने इसे शांति की दिशा में अहम कदम बताते हुए कहा कि संवाद ही संघर्ष का समाधान है।
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