श्रीनगर , मई 11 -- जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को युवाओं से दूसरों की नकल करने के बजाय अपनी विशिष्टता अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि दुनिया को ऐसे अद्वितीय व्यक्तित्व वाले युवाओं की आवश्यकता है, जो अपनी पूर्ण क्षमता को पहचान सकें और भविष्य की पीढ़ियों को प्रेरित कर सकें।

श्री सिन्हा ने आज यहां राष्ट्रीय युवा महोत्सव 'आरोहण 2026' के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि यह आयोजन 'उठो, चमको और विजय प्राप्त करो' के नये दृष्टिकोण को दर्शाता है। इसका लक्ष्य 2047 तक विकसित भारत का निर्माण करना है। उन्होंने कहा, "यह आयोजन हमारे युवाओं के लिए 'उठो, चमको और विजय प्राप्त करो' के नये दृष्टिकोण की घोषणा करता है, जो भविष्य की राह रोशन करने वाला संपूर्ण दर्शन, वादा और 2047 तक विकसित भारत बनाने की एक साहसिक चुनौती है।"उपराज्यपाल ने कहा, "राष्ट्रीय युवा महोत्सव इस बात की भी उद्घोषणा है कि युवाओं का समय आ गया है। युवा महोत्सव के 'युवा नेतृत्व संवाद' के माध्यम से हम वह आधार और ढांचा तैयार कर रहे हैं, जिस पर भारत की गौरवशाली विरासत का अगला अध्याय गर्व से खड़ा होगा।" उन्होंने कहा कि इतिहास उन्होंने कभी नहीं रचा, जिन्होंने असाधारण बनने की अनुमति का इंतजार किया। उन्होंने 'विकसित जेके युवा नेतृत्व संवाद', 'हैकाथॉन' और 'सांस्कृतिक कार्यक्रम' में भाग लेने वाले युवाओं से आगे आने और एक ऐसे विकसित भारत के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध होने का आग्रह किया, जिस पर आने वाली पीढ़ियां गर्व कर सकें।

उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज के बिना शासन फल-फूल नहीं सकता और समावेशी शासन का अर्थ यह सुनिश्चित करना है कि हर प्रमुख क्षेत्र में हो रहे कार्यों में युवाओं की वास्तविक भागीदारी हो। उन्होंने कहा, "प्रत्येक युवा लड़का-लड़की में अविश्वसनीय प्रतिभा होती है। उन्हें बस अवसरों और खुद पर विश्वास की जरूरत है। मैं चाहता हूं कि भारत के युवा घिसे-पिटे रास्तों पर चलने के बजाय अपने मार्ग स्वयं बनायें, क्योंकि नवाचार और आविष्कार अनछुए रास्तों से ही उपजते हैं। भारत को आज ऐसे युवाओं की आवश्यकता है, जो पहले से बने-बनाये सांचों को तोड़ने का साहस रखते हों।"उपराज्यपाल ने कहा, "संस्कृति हमारी पहचान है और यह हमारे अस्तित्व का जीवंत प्रमाण है, जो यह बताती है कि हम कौन हैं और कौन से सपने व आकांक्षाएं हमें आगे बढ़ाती हैं। जब युवा संगीत, कला, साहित्य, नृत्य, रंगमंच, खेल और शिल्प के माध्यम से खुद को अभिव्यक्त करते हैं, तो वे स्वयं भारत की आत्मा को स्वर दे रहे होते हैं।" उन्होंने कहा कि युवाओं को दूसरों की नकल करने के बजाय अपनी विशिष्टता को अपनाना चाहिए और अपनी पूर्ण क्षमता को पहचानना चाहिए। दुनिया को पहले से मौजूद किसी व्यक्ति की एक और नकल की जरूरत नहीं है। इसे प्रतियों की कोई चाह नहीं है। इसे आप जैसे अद्वितीय युवाओं की आवश्यकता है। ऐसे व्यक्ति कि जिनका व्यक्तित्व सबसे अलग हो, जो न केवल अपने लिए चमकें, बल्कि अपने बाद आने वालों का मार्ग भी प्रशस्त करें।

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