श्रीनगर , दिसंबर 15 -- जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को कहा कि यहां की जलविद्युत परियोजनाओं का राष्ट्रीय महत्व है और इसमें किसी प्रकार का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं होगा।

श्री अब्दुल्ला ने यहां पत्रकारों से कहा कि इसमें हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए और इस मामले को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि जो संस्थाएं पहले निर्वाचित सरकार के अधीन काम करती थीं उन्हें बहाल किया जाना चाहिए। अपने पोर्टफोलियो का उल्लेख करते हुए श्री अब्दुल्ला ने कहा कि उनके पास विद्युत मंत्रालय का प्रभार भी है लेकिन जम्मू-कश्मीर विद्युत विकास निगम को अभी तक निर्वाचित सरकार को वापस नहीं सौंपा गया है।

उन्होंने कहा, "आप और मैं दोनों जानते हैं कि अगर यह आरोप मेरे किसी भी मंत्री के खिलाफ लगाया गया होता, तो भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो छापेमारी करती।"जम्मू-कश्मीर के किश्तवार जिले में 850 मेगावाट की रतले जलविद्युत परियोजना के निर्माण से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्थानीय भाजपा विधायक पर काम में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया जिसके बाद एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि लगातार व्यवधान के कारण कंपनी को परियोजना से पीछे हटना पड़ सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना जम्मू-कश्मीर की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में से एक है और इस परियोजना की नींव 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रखी थी। चिनाब नदी पर बन रही 3,700 करोड़ रुपये की यह परियोजना केंद्र सरकार के स्वामित्व वाली एनएचपीसी लिमिटेड और जम्मू-कश्मीर नगर निगम परिषद (जेकेपीडीसी) का संयुक्त उद्यम है। उनोंने जोर दिया कि जम्मू-कश्मीर में जलविद्युत परियोजनाएं केवल केंद्र शासित प्रदेश के लिए नहीं हैं बल्कि पूरे देश के लिए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि किश्तवार में विकास परियोजनाओं में हस्तक्षेप किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा , "हमने एक विधायक की बात की है लेकिन किश्तवार में हर परियोजना में विपक्ष के दोनों विधायक कहीं न कहीं हस्तप कर रहे हैं।" उन्होंने जवाबदेही की मांग करते हुए कहा कि जांच एजेंसियों को बिना किसी पूर्वाग्रह के काम करना चाहिए।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित